जिला शिक्षा विभाग ने निजी स्कूलों पर नकेल कसने की तैयारी कर ली है। जिले के सीबीएसई और हरियाणा बोर्ड के तहत आने वाले निजी स्कूल अब मनमानी नहीं कर सकेंगे।
शिक्षा विभाग इन स्कूलों में मनमानी फीस वृद्धि, विभिन्न फंड के तहत वसूले जाने वाले शुल्क, यूनिफॉर्म व कॉपी-किताबों को खरीदने की बाध्यता आदि बिंदुओं की समीक्षा की जाएगी।
शिक्षा विभाग को जिला उपायुक्त ने सख्त निर्देश दिए हैं कि जल्द से जल्द ऐसे स्कूलों की समीक्षा की जाए और शिक्षा नियमावली-2003 के कानून व प्रावधानों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
जिला शिक्षा अधिकारी सतेंद्र वर्मा के मुताबिक इस कार्रवाई के दायरे में सीबीएसई व हरियाणा बोर्ड के सभी प्राइवेट स्कूल आएंगे।
नहीं वसूल सकेंगे पूरी फीस
सतेंद्र वर्मा ने बताया कि शिक्षा नियमावली के तहत निजी स्कूल प्रबंधक आगामी शिक्षा सत्र(अप्रैल-2016) के लिए शुरू होने वाले दाखिलों के लिए एडवांस में पूरी फीस नहीं वसूल सकेंगे।
आमतौर पर स्कूल अप्रैल माह में दाखिले के समय जून-जुलाई माह तक की फीस भी अभिभावकों से वसूल लेते हैं। लेकिन इस बार से स्कूल प्रबंधक ऐसा नहीं कर सकेंगे। स्कूलों को इस बार से सिर्फ टोकन रजिस्ट्रेशन फीस लेकर ही दाखिला करना होगा।
मनमाने फंड नहीं बना सकेंगे स्कूल
शिक्षा विभाग के मुताबिक अभिभावकों की ओर से लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि स्कूल प्रबंधक मनमाने तरीके से अलग-अलग फंड बनाकर फीस वसूल रहे हैं।
डवलेपमेंट चार्ज, वार्षिक कार्यक्रम शुल्क, कंप्यूटर शुल्क, लैब चार्ज आदि सहित स्कूलों ने मनमर्जी से अलग-अलग फंड बना रखे हैं। लेकिन अब स्कूल केवल ट्यूशन फीस, दाखिला शुल्क, खेल शुल्क, पीटीए और साइंस फीस आदि में ही शुल्क ले सकते हैं।
शिक्षा अधिकारी सतेंद्र कौर ने बताया कि उन्हें अभिभावकों की ओर से शिकायतें मिली हैं कि अभी से स्कूलों ने चार-पांच माह की फीस वसूलना शुरू कर दिया है। इन शिकायतों की विभाग जांच कर रहा है।
इसके अलावा स्कूल अभिभावकों को यूनिफॉर्म और कॉपी-किताबें अपनी बताई दुकानों से ही खरीदने के लिए बाध्य करते हैं। विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि इस तरह की कोई भी शिकायत वे शिक्षा विभाग कार्यालय में कर सकते हैं।