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दिल्ली: नोटबंदी के दौरान फर्जी खाते खुलवाकर नौ करोड़ जमा करने वाला आरोपी गिरफ्तार

Fri, 25 Dec 2020 04:27 PM IST
Mohit Mudgal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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आरोपी गौरव सिंघल - फोटो : ANI
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नोटबंदी के दौरान फर्जी कागजातों से नौ बैंक खाते खुलवाकर नौ करोड़ रुपये का काले धन को जमा करने वाले आरोपी को आर्थिक अपराध शाखा ने गिरफ्तार किया है। आरोपी के खिलाफ आयकर विभाग ने शाखा में शिकायत दर्ज करवायी थी। उसके बाद से आरोपी फरार था। 

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शाखा के संयुक्त आयुक्त डॉक्टर ओपी मिश्रा ने बताया कि आरोपी की पहचान नवीन शाहदरा निवासी गौरव सिंघल के रूप में हुई है। आयकर अधिकारी राजेश कुमार गुप्ता ने वर्ष 2018 में शाखा में शिकायत दर्ज करवाई। जिसमें बताया कि 9 नवंबर 2016 से 30 दिसंबर 2016 के बीच अलग-अलग बैंक खातों में 9 करोड़ रुपये जमा किए गए हैं। सभी बैंक खाते फर्जी कागजात पर खुलवाए गए थे। बैंकों से पूछताछ में पता चला कि खाताधारक विश्वास नगर के एक ही परिसर से व्यवसायिक गतिविधियां चला रहा है। केवाईसी दस्तावेजों की तस्वीरों से खातों के मालिक की पहचान गौरव सिंघल के रूप में हुई।

आईटी अधिनियम के तहत उससे पूछताछ की गई, जिसमें उसने बताया कि फर्जी पेन कार्ड और मतदाता पहचान पत्र से खाते खुलवाए और नोटबंदी के दौरान उसमें काला धन डलवाया। आयकर अधिकारी की शिकायत पर शाखा की टीम जांच शुरू की। जांच में पता चला कि बैंक खाते योगेश जैन और राहुल जैन के नाम से खुलवाए गए थे। जिसपर गौरव सिंघल ने अपने फोटोग्राफ लगाए थे और उसमें अपने फोन नंबर दिए थे।
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खाते से ज्यादातर पैसे मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग से निकाले गए थे। जांच में पता चला कि नोटबंदी के दौरान काले धन को रखने के लिए फर्जी नाम और पते से खाते खुलवाए गए। मामला दर्ज होने के बाद गौरव सिंघल फरार हो गया। निरीक्षक अमित चौधरी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने उसकी तलाश में यमुनापार, रोहिणी और नोएडा में दबिश दी। इस बीच पुलिस को पता चला कि आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए अपने घर के पास ही किसी पीजी में रह रहा है। इस सूचना पर पुलिस टीम ने 24 दिसंबर को नवीन शाहदरा से उसे गिरफ्तार कर लिया।
 
पूछताछ में पता चला कि वह दसवीं तक पढ़ा है। उसके बाद एक केबल कंपनी में सुपरवाइजर की नौकरी करने लगा। यहां उसकी मुलाकात कई सप्लायर से हुई। जिससे उसने जीएसटी और वैट में फायदे के लिए फर्जी बिल बनाना सीख लिया। नोटबंदी के दौरान लोगों के काले धन को छुपाने के लिए उसने फर्जी खाते खोले। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है। 
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