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जानिए, मोदी का ये टॉयलट क्यों है खास

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प्रधानमंत्री ने 2 अक्टूबर को अपनी महत्वकांक्षी योजना स्वच्छ भारत अभियान का शुरूआत की। इस मौके पर पीएम ने हर घर में शौचालय होने का वादा करते हुए वाल्मिकि सदन के पास ही एक इको फ्रेंडली टॉयलट शौचालय का उद्घाटन किया। वाल्मिकि सदन ही वो जगह है, जहां पर झाड़ू लगाकर पीएम ने स्वच्छता अभियान की शुरूआत की थी।
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ग्रैंड्यूर बिजैनस प्राइवेट लिमिटेड के एमडी मुकेश सखूजा ने बताया कि बॉयो डायजेस्टर शौचालय न केवल शहरों की ही नहीं बल्कि ग्रामीण इलाकों की तस्वीर बदल देंगे। यह शौचालय डिफेन्स रिसर्च डेवलपमेंट आर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) टेक्नोलॉजी से बनाया गया है।

मुकेश ने आगे कहा कि, यह शौचालय बाहर में शौच के मुकाबले एक बेहतरीन, टिकाऊ और लंबे समय तक चलने वाला विकल्प है। इस प्रकार के शौचालय में शौच का संवाहन 100 फीसदी इको फैंडिली तरीके से होगा।
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ब‌िना सीवर स‌िस्टम के काम करता है ये शौचालय

इस शौचालय के रख रखाव में भी कोई खर्च नहीं आता और इसे किसी भी पारंपरिक ऊर्जा स्रोत की आवश्यकता भी नहीं पड़ती। इन्हें साफ-सफाई की भी जरूरत नहीं पड़ती और ना ही किसी सीवर सिस्टम की क्योंकि इसकी बनावट बहुत ही अनोखी है।

सखूजा ने बताया कि शौचालय नेशनल बिल्डिंग कारपोरेशन लिमिटेड के स्वच्छ भारत अभियान के इको-फेंडली प्रोजेक्ट के तहत बनाया गया है।

कम्पनी के एक डायरेक्टर गीरीश मेदीरत्ता ने बताया कि इस प्रकार के शौचालय पहाड़ी इलाके,‌ नदी के किनारों और ग्रामीण इलाकों में आराम से बनाए जा सकते हैं।

कम्पनी के एक और डायरेक्टर आदित्य सखूजा ने कहा कि शौचालय की कमी के कारण आज भी देश की 30 फीसदी शहरी और 90 फीसदी ग्रामीण आबादी खुले में शौच करती है। यह प्रयास उन शहरी और ग्रामीण इलाकों के लिए आदर्श है, जहां सीवर की सु्विधा नहीं है या वो उचित रूप से कार्य नहीं करता है।
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