कक्षा के बच्चों को होगा अंकों का ज्ञान
डायट प्रवक्ता सुमिता सचान व एसआरजी अशोक कुमार ने बताया कि अब तक इन बच्चों को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पढ़ाती थी। जब यह बच्चे परिषदीय स्कूलों में कक्षा एक में पहुंचते थे तो इनके साथ शिक्षकों को लगना पड़ता था। अब यह बच्चे जब परिषदीय स्कूलों में कक्षा एक में पहुंचेंगे तो इन्हें अंकों का ज्ञान होगा। इसके साथ ही वर्णमाला को भी पहचानते होंगे। जिससे इन्हें निपुण बनाने में काफी मदद मिलेगी। नई शिक्षा नीति के तहत अब छह साल के बच्चों का ही कक्षा एक में प्रवेश होता है। पांच से छह वर्ष के बच्चों को आंगनबाड़ी में ही पढ़ना पड़ता है। यहां बच्चे बैठना सीखते हैं। अब बच्चों को बैठने के साथ ही निजी स्कूलों की तर्ज पर सिखाया जाएगा। वहीं अब आंगनबाड़ी कार्यकर्ता केवल तीन से पांच साल तक के बच्चों को ही पढ़ाएंगी। वह उन्हें बैठना और अक्षरों के ज्ञान की जानकारी देगी। नई शिक्षा नीति के तहत अब वह 5 साल से ऊपर वाले बच्चों को नहीं पढ़ाएंगी।
एजुकेटर्स को हर माह मिलेंगे 10,300 रुपये
इसके लिए बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से ईसीसीई एजुकेटर्स की नियुक्ति की गई है। इन्हें हर माह 10 हजार 300 रुपये मिलेंगे। इनकी जिम्मेदारी केवल पांच से छह वर्ष के बच्चों को खेल खेल में पढ़ाने की होगी। इनकी भी मॉनिटरिंग की जाएगी। जिन ईसीसीई एजुकेटर्स का परिणाम अच्छा नहीं होगा उन्हें 11 माह का कार्यकाल पूरा होने के बाद हटा दिया जाएगा।
इन स्कूलों में हुआ चयन
कंपोजिट स्कूल छलेरा, प्राथमिक स्कूल तिलपता एक, कंपोजिट स्कूल घोड़ी बछेड़ा, उच्च प्राथमिक स्कूल हरौला, कंपोजिट स्कूल नीमका 2, कंपोजिट स्कूल सुल्तानपुर, कंपोजिट स्कूल सलारपुर, पीएम श्री कंपोजिट स्कूल, कपोजिट स्कूल खानपुर, कंपोजिट स्कूल सिरसा, कंपोजिट स्कूल जुनपत, कंपोजिट स्कूल निठारी, कंपोजिट स्कूल रायपुर बांगर,कंपोजिट स्कूल आगाहपुर के साथ अन्य स्कूलों में ईसीसीई एजुकेटर्स की तैनाती की गई है।
प्रदेश में सबसे पहले जनपद में ईसीसीई एजुकेटर्स का प्रशिक्षण कराया गया है। जुलाई में ही सब ईसीसीई एजुकेटर्स बच्चों को पढाने लगेंगे। पांच से छह साल के बच्चों को अब ईसीसीई एजुकेटर्स भाषा और गणित में निपुण बनाएंगे। - राज सिंह यादव, डायट प्राचार्य