अदालत ने पूर्वोत्तर दिल्ली दंगों से संबंधित चार मामलों में आरोपी को जमानत देने से इंकार कर दिया। अदालत ने कहा आरोपी को एक चश्मदीद गवाह ने 'उपद्रवी भीड़' के कथित सदस्य के रूप में स्पष्ट रूप से पहचाना है और सीसीटीवी फुटेज में उसे दंगो में शामिल होते हुए देखा गया है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने करावल नगर क्षेत्र में हुए दंगों से जुड़े मामलों में आरोपी प्रवीण गिरी की जमानत अर्जी खारिज करते हुए कहा कि आरोपी को चश्मदीद गवाह कल्याण सिंह ने घटना की तारीख और समय पर 'दंगाई भीड़' के सदस्य के रूप में स्पष्ट रूप से पहचाना है। इतना ही नहीं उसे इलाके में रियाज मलिक की दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे में भी देखा गया है। उसे दुकान में तोडफोड देखा गया है।
अदालत ने कहा पुलिस के अनुसार घटना के समय उसके द्वारा पहने कपड़े भी पुलिस ने उसकी निशानदेही पर बरामद किए है। अदालत ने कहा मामलों में गवाह उसी इलाके के निवासी है इसलिए आरोपी द्वारा उन्हें धमकी देने या डराने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में आरोपी को जमानत देना उचित नहीं है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता गिरी के अधिवक्ता ने तर्क रखा कि पुलिस ने उनके मुवक्किल को फर्जी तरीके से इस मामले में फंसाया है। वहीं सरकारी वकील नितिन राय शर्मा ने जमानत पर आपत्ति करते हुए तर्क रखा कि आरोपी की दंगो में सक्रिय भूमिका रही है।