सरकार के ग्रीन और क्लीन फैसले का असर मेवात में दिखने लगा है। सबसे व्यस्त चौराहे बड़कली चौक पर ई-रिक्शा लोगों की रोजी रोटी का साधन बना है। वहीं पुराने ढर्रे से भी लोगों को छुटकारा मिला है। अब डीजल ऑटो की धीरे-धीरे छुट्टी होने लगी है। इस नई मशीनरी को लोग ज्यादा तवज्जो देने लगे हैं।
मेवात के देहात में ई-रिक्शा को हाथों हाथ लिया जा रहा है। सवारियां अपने सफर को सुहाना बनाने के लिए ऑटो रिक्शा व रिक्शा के स्थान पर इसका इस्तेमाल कर रही हैं। खास वजह ये है कि ई-रिक्शा से किसी प्रकार का ध्वनि प्रदूषण नहीं फैलता और सवारियों को बेवजह की आवाज से भी छुटकारा मिलता है।
बड़कली चौक से नगीना की दूरी करीब दो किलोमीटर पड़ती है इसके अलावा बड़कली से अलआफिया अस्पताल की दूरी भी लगभग इतनी ही है। आसानी से सवारियाें को ई-रिक्शा उन्हीं सस्ते दामों पर उपलब्ध हो रहा है, जितने में ऑटो रिक्शा मिलता है।
बड़कली से नगीना रूट पर दो प्रकार के ई-रिक्शा चल रहे हैं। एक में दो से चार सवारियां जबकि दूसरे में 8 सवारियां आसानी से बैठती हैं। डीजल थ्रीव्हीलर के मुकाबले ई-रिक्शा की कीमत कम है। ई-रिक्शा को चलाने के लिए चार्जिंग की आवश्यकता पड़ती है।
इसके लिए ई-रिक्शा चलाने वाले अपने पास एक अतिरिक्त बैट्री रखते हैं। मतलब ये है कि सुबह से शाम तक एक बार बीच में बैट्री चार्ज करनी पड़ती है। बड़कली से नगीना का किराया मात्र 5 रुपये है। ई-रिक्शा चालक सुबह से शाम तक करीब 20 चक्कर लगाकर 700 से 800 रुपये रोजाना कमा भी लेते हैं।
किशन करहेड़ा ने बताया कि ई-रिक्शा पर्यावरण को कई प्रकार के प्रदूषण से बचाने में सहायक है। नगीना के सरपंच नसीम अहमद बताते हैं कि ई-रिक्शा से सवारियों का सफर सुहाना और प्रदूषण मुक्त हुआ है।