राजधानी में बिना लाइसेंस व नंबर प्लेट के चल रहे ई-रिक्शा के संबंध में दिशा निर्देश तय न करने पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा ई-रिक्शा का व्यावसायिक प्रयोग हो रहा है और इससे लोगों का जीवन खतरे में है। इसके बावजूद सरकार खामोश है।
न्यायमूर्ति प्रदीप नंदराज योग व न्यायमूर्ति जयंत नाथ की खंडपीठ ने कहा कि यह काफी गंभीर मामला है। याची द्वारा पेश फोटो की ओर सरकार व एमसीडी के वकील का ध्यान दिलाते हुए अदालत ने पूछा क्या ई-रिक्शा व्यावसायिक प्रयोग के लिए चलाया गया है। फोटो में स्पष्ट है कि यात्रियों की बजाय ई-रिक्शा सामान से भरकर सड़कों पर दौड़ रहे हैं।
खंडपीठ ने कहा कि ई-रिक्शा दो से चार यात्रियों के लिए बनाया गया है, लेकिन उसमें आठ-आठ यात्रियों को बैठाया जा रहा है। इससे यात्रियों का जीवन खतरे में है। ई-रिक्शा का व्यावसायिक प्रयोग कैसे होने दिया जा रहा है? इसके लिए दिशा निर्देश क्यों नहीं तय किए जा रहे हैं?
अदालत ने सभी पक्षों को इस संबंध में दिशा निर्देश तय कर 19 मार्च को रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। खंडपीठ सामाजिक कार्यकर्ता शहनबाज हुसैन द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।
याचिका में शहनबाज हुसैन ने तर्क रखा कि ई-रिक्शा 12 वोल्ट की चार बैटरी से चलता है। उसकी शक्ति क्षमता 650 से 850 वाट होती है। इसे मात्र चार व्यक्तियों के लिए बनाया गया है। इसमें आठ-आठ लोगों को बैठाकर चालक उनके जीवन के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि ई-रिक्शा का न तो कोई पंजीकरण किया गया है न ही उस पर कोई नंबर प्लेट है। उन्होंने कहा नॉन मोटर वाहन श्रेणी में होने के कारण परिवहन विभाग अपनी कोई जिम्मेदारी नहीं मानता है।