डूटा अध्यक्ष प्रो. एके भागी के अनुसार दिल्ली सरकार से 100 फीसदी वित्त पोषित 12 कॉलेजों को अपर्याप्त राशि जारी की जा रही है। जिसके कारण शिक्षकों, नॉन टीचिंग स्टाफ को वेतन का भुगतान नहीं किया जा रहा।
दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (डूटा) के एक प्रतिनिधि मंडल ने सोमवार को उपराज्यपाल वीके सक्सेना से मुलाकात की। मुलाकात के दौरान डूटा ने दिल्ली सरकार से 100 फीसदी वित्त पोषित डीयू से संबद्ध 12 कॉलेज में वित्तीय संकट और कॉलेज ऑफ आर्ट्स के मामले को उठाया। उपराज्यपाल को बताया गया कि इन कॉलेजों में फंड संकट में मामले को तत्काल सुलझाने की आवश्यकता है।
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डूटा के इस प्रतिनिधि मंडल में डूटा पदाधिकारियों के साथ डीयू कार्यकारी परिषद सदस्य और अधिवक्ता मोनिका अरोड़ा और दिल्ली विधानसभा में नेता विपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी भी शामिल थे। डूटा अध्यक्ष प्रो. एके भागी के अनुसार दिल्ली सरकार से 100 फीसदी वित्त पोषित 12 कॉलेजों को अपर्याप्त राशि जारी की जा रही है। जिसके कारण शिक्षकों, नॉन टीचिंग स्टाफ को वेतन का भुगतान नहीं किया जा रहा। उन्होंने बताया कि उपराज्यपाल ने फंड संकट के मुद्दे को गंभीरता से सुना।
प्रो. भागी ने दावा किया कि दिल्ली सरकार द्वारा लगभग 120 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई थी, जिससे कॉलेज के अधिकारियों को कॉलेजों के दैनिक मामलों का प्रबंधन करने और वेतन और अन्य भत्तों का भुगतान करने में समस्या हो रही है। डूटा सचिव डॉ. सुरेंद्र सिंह ने कहा कि फंड संकट के मुद्दे को सुलझाने की तत्काल आवश्यकता है क्योंकि कर्मचारियों को उनका बकाया नहीं मिल रहा है, छात्र और शिक्षक सामान्य बुनियादी ढांचे की कमी के कारण परेशान हैं। कॉलेज ऑफ आर्ट्स के बारे में प्रो. भागी ने बताया कि एलजी ने आश्वासन दिया है कि वह एलजी कार्यालय के पुराने रिकॉर्ड और पत्राचार को देखेंगे और उसके अनुसार कदम उठाएंगे। डॉ. सुरेंद्र सिंह ने कहा कि कॉलेज ऑफ आर्ट्स का मामला अदालत में लंबित है। उपराज्यपाल को छात्रों के हिट में हस्तक्षेप करना चाहिए।