अब कांग्रेस खासकर दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) चुनाव में इस आधार को चुनौती देने के लिए रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं, शिक्षा, युवा नेतृत्व और सोशल मीडिया को केंद्र में रखकर अपनी रणनीति तैयार कर रही है।
दिल्ली की राजनीति में युवा मतदाता अगले चुनावी समीकरणों को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण वर्ग बनकर उभर रहा है। भाजपा ने छात्र राजनीति, युवा संगठनों और सोशल मीडिया के जरिए युवाओं के बीच अपनी मजबूत राजनीतिक मौजूदगी बनाई है। अब कांग्रेस खासकर दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) चुनाव में इस आधार को चुनौती देने के लिए रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं, शिक्षा, युवा नेतृत्व और सोशल मीडिया को केंद्र में रखकर अपनी रणनीति तैयार कर रही है।
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कांग्रेस नेताओं के अनुसार, उनकी पार्टी की चुनौती अब छात्र राजनीति तक सीमित रखने के बजाय कॉलेजों से निकलकर पहली बार मतदान करने वाले युवाओं और रोजगार की तलाश कर रहे युवा वर्ग तक पहुंचने की है। मगर पार्टी के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि भाजपा के साथ जुड़ चुके युवा मतदाताओं को किन मुद्दों पर अपने पक्ष में लाया जाए।
कांग्रेस की रणनीति में रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी समस्याएं प्रमुख मुद्दा बन सकती हैं। क्योंकि सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे युवाओं के बीच भर्ती प्रक्रिया में देरी, परीक्षाओं की अनियमितता, पेपर लीक और रोजगार के सीमित अवसर जैसे मुद्दे राजनीतिक बहस का हिस्सा बन रहे हैं। कांग्रेस इन मुद्दों को उठाकर युवाओं में अपनी जगह बनाने की कोशिश में है।
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डूसू चुनाव में उच्च शिक्षा की बढ़ती लागत, कॉलेजों में सुविधाएं, छात्रवृत्ति, कौशल विकास और रोजगार से जुड़ी शिक्षा जैसे विषय भी कांग्रेस के एजेंडे में होंगे। पार्टी की कोशिश है कि युवाओं के सामने केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि शिक्षा और कॅरियर से जुड़े ठोस सवाल रखे जाएं। दूसरी ओर, भाजपा की डिजिटल पहुंच को देखते हुए कांग्रेस की रोजगार, शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर लगातार और प्रभावी डिजिटल अभियान चलाने की योजना है।