नर्सरी दाखिले के लिए जारी की गई गाइडलाइंस में नेबरहुड के लिए छह किलोमीटर के दायरे को बढ़ाने की मांग उठने लगी है। दूरी के लिए मिलने वाले 70 अंक के लिए नए सिस्टम में 10 किलोमीटर करने की सिफारिश की गई है।
नए नियमों में दूरी को लेकर स्कूल संगठन पहले ही आपत्ति जता रहे थे, अब सोशल ज्यूरिस्ट संस्था ने भी दूरी का दायरा 10 किलोमीटर करने का सुझाव दिया है।
शिक्षा निदेशक के बुलावे पर पहुंचे सोशल ज्यूरिस्ट संस्था के एक प्रतिनिधिमंडल ने निदेशालय के अधिकारियों के समक्ष एक प्रेजेंटेशन दिया।
संस्था के सलाहकार और अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने बताया कि दूरी के तहत तय किए गए छह किलोमीटर के दायरे को बढ़ाकर 10 किलोमीटर किए जाने की बात हुई है।
इसके साथ ही अगर नियमों इन बदलावों को लागू किया जाता है तो सिबलिंग की श्रेणी में 20 फीसदी से ज्यादा और एल्युमिनी श्रेणी में 10 फीसदी से ज्यादा सीटें न रखी जाएं।
अभी निदेशालय ने जो सिस्टम जारी किया है उसके तहत सिबलिंग के लिए 20 व एल्युमिनी के लिए 5 अंक निर्धारित किए हैं। ऐसा होने से जनरल वर्ग के लिए 70 फीसदी सीटें रहेंगी और दाखिला आसान होगा।
सूत्रों की मानें तो इस संबंध में शिक्षा निदेशक मंगलवार को उपराज्यपाल से मुलाकात कर सकते हैं। सिस्टम में बदलाव होगा या नहीं इस पर एलजी को ही फैसला लेना है।
गरीब व वंचित वर्ग के लिए दूरी बढ़ाने की मांग
राष्ट्रीय अभिभावक संघ ने सामान्य वर्ग के साथ-साथ गरीब व वंचित वर्ग के लिए दूरी का दायरा एक किलोमीटर की बजाय छह किलोमीटर तक बढ़ाने की मांग की है। इसके लिए संघ ने निदेशालय को एक पत्र भी लिखा है।
अशोक अग्रवाल ने कहा कि कोटे के दाखिले में पहले एक किलोमीटर के आधार पर सीटें भरी जाती हैं फिर तीन और फिर छह किलोमीटर के आधार पर सीटें भरी जाती हैं।
उन्होंने मांग की है कि शुरुआत से सीटें भरने के लिए दायरे को छह किलोमीटर कर दिया जाए। इससे सीटें आसानी से भर सकेंगी।
सर्वे में 28 फीसदी ने कहा कि बढ़े दायरा
नर्सरी गाइडलाइंस को लेकर एक वेबसाइट की ओर से किए गए एक सर्वे में यह बात सामने आई है कि 28 फीसदी अभिभावक चाहते हैं कि दूरी के दायरे को बढ़ाकर 10 किमी किया जाए।
सर्वे में कुल 1650 वोट पड़े। इनमें 462 अभिभावक इस सिस्टम से दाखिले को लेकर संशय में हैं। सर्वे में 10.4 फीसदी अभिभावक मानते हैं कि नए सिस्टम के कारण उन्हें दूरी का कोई अंक नहीं मिल रहा है।