-पांच करोड़ रुपये की लागत से हुआ नवीनीकरण
-कुलपति प्रो योगेश सिंह ने मंगलवार को किया इस हॉल का उद्घाटन
-वर्ष 1948 में इस हॉल का नींव का पत्थर रखा गया था, तैयार होने के बाद से 2005 तक यहीं होते रहे दीक्षांत समारोह
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली विश्वविद्यालय का ऐतिहासिक कन्वोकेशन हॉल अब वंदे मातरम् हॉल कहलाएगा। अब 2026 में इस हॉल के नवीनीकरण के बाद इसे वंदे मातरम् हॉल नाम दिया गया है। करीब 5 करोड़ रुपए की लागत से इसे नए सिरे से तैयार किया गया है। वर्ष 1948 में इस हॉल का नींव का पत्थर रखा गया था, इसके तैयार होने के बाद से 2005 तक इसी में डीयू के दीक्षांत समारोह होते रहे। बीते दिसंबर में फैकल्टी ऑफ आर्ट्स में बने कॉन्वोकेशन हॉल का नाम नवीनीकरण के पश्चात वंदे मातरम् हॉल रखने को मंजूरी दी गई थी।
दिल्ली विश्वविद्यालय की फैकल्टी ऑफ आर्ट्स में वंदे मातरम् हॉल का उद्घाटन मंगलवार को डीयू कुलपति प्रो योगेश सिंह ने किया। इसके साथ ही हॉल के द्वार पर पूर्ण वंदे मातरम् के शिलालेख का अनावरण भी किया गया। कुलपति ने कहा कि वंदे मातरम् हॉल अनेकों वर्षों तक प्रेरणा का काम करेगा। आज देश वंदे मातरम् के 150 वर्ष मना रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1948 से लेकर 2005 तक इस हॉल में अनेकों दीक्षांत हुए और भारत के राष्ट्रपति सहित अनेकों महान विभूतियों ने इस हॉल में अपने अपने कदम रखे। जब भी डीयू का इतिहास लिखा जाएगा तो इस हॉल का इतिहास भी लिखा जाएगा। कुलपति ने बताया कि डीयू में जितने भी निर्माण व नवीनीकरण के कार्य चल रहे हैं वह सभी 2027 तक पूर्ण हो जाएंगे। इस अवसर पर फैकल्टी ऑफ आर्ट्स के डीन प्रो इन्द्र नारायण सिंह डीन प्लानिंग प्रो निरंजन कुमार, डीन ऑफ कॉलेजेज़ प्रो बलराम पाणी, दक्षिणी परिसर की निदेशक प्रो रजनी अब्बी और रजिस्ट्रार डॉ विकास गुप्ता सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
पांच करोड़ की लागत से इसे किया तैयार
इस हॉल का नींव पत्थर 1948 में रखा गया था। अब इसका नवीनीकरण किया है। यह पांच करोड़ की लागत से नए सिरे से तैयार हुआ है। विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग विभाग के अनुसार इस को पूरी तरह से नवीनीकृत किया गया है। इसकी स्ट्रक्चर स्ट्रैंथनिंग के साथ-साथ 688 लोगों के बैठने की क्षमता है। इसमें कई तरह की अत्याधुनिक सुविधाएं भी हैं। आधुनिक आडियो सिस्टम भी नए सिरे से स्थापित किए गए हैं।