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अस्पताल के सामने जन्मी बच्ची, नहीं पिघले डॉक्टर

Sun, 07 Jun 2015 11:03 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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राजधानी के सरकारी अस्पतालों में एक बार फिर मानवता तार-तार हो गई। यहां एक गर्भवती महिला करीब आधे घंटे तक अस्पताल के गेट के पास प्रसव पीड़ा से कराहती रही, लेकिन अस्पताल कर्मियों व डॉक्टरों का दिल नहीं पसीजा।
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जिसके चलते गेट के पास ई-रिक्शा में ही गर्भवती ने बच्ची को जन्म दे दिया। मामला उछलने के बाद अब अस्पताल प्रबंधन पूरे मामले पर सफाई देकर कह रहा है कि जैसे ही महिल्रा आई, हमने भर्ती कर लिया है।

खास बात यह है कि जच्चा और बच्चा दोनों सुरक्षित हैं और अब अस्पताल में उनका इलाज हो रहा है। सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र अस्पताल में नरेला टीकरी की रहने वाली रिपु नाम की महिला को लेकर करीब 12:45 बजे ई रिक्शा पर लेकर पहुंचे।
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दर्द से कराहती रही महिला

इमरजेंसी में गर्भवती की रिश्तेदार शांति देवी डॉक्टरों से गर्भवती को भर्ती करने की गुहार लगा रही थी, लेकिन डॉक्टर व नर्स ने कोई सुनवाई नहीं की। इस दौरान गर्भवती प्रसव पीड़ा में कराहती ई-रिक्शा में भी तड़पती रही।

अचानक प्रसव पीड़ा तेज हुई तो रिश्तेदार इमरजेंसी से भागकर गेट के बाहर ई-रिक्शा तक पहुंचे। इस दौरान दूसरे अस्पताल ले जाने का समय नहीं था। तब उन लोगों ने ई-रिक्शा को चारों ओर से चादर से ढक दिया।

इसी बीच गर्भवती ने दोपहर करीब 1:15 बजे बच्ची को जन्म दिया। इसी बीच गेट के बाहर ई-रिक्शा में बच्ची के जन्म की सूचना अस्पताल प्रबंधन तक पहुंची तो आनन-फानन में डॉक्टर दोपहर करीब 1:25 बजे जच्चा व बच्चा को स्टैचर में अंदर ले गए।
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लापरवाही से जा सकती थी जान

महिला की रिश्तेदार शांति के मुताबिक, हम लोगों ने डॉक्टर व नर्स से प्रसव पीड़ा से कराहने की पूरी जानकारी दी थी, लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं था।

यह तो भगवान का शुक्र है कि जच्चा व बच्चा सुरक्षित हैं, लेकिन भगवान कहे जाने वाले डॉक्टरों की लापरवाही दोनों की जिंदगी पर भारी पड़ सकती थी।

बताया जाता है कि वहां पर पहुंचे कुछ लोगों व मीडियाकर्मियों के दबाव के कारण ही अस्पताल ने उसे भर्ती किया जबकि पूरे घटनाक्रम का किसी ने वीडियो भी बना लिया।
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