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नगर निगमों का दिल्ली सरकार पर 10 हजार करोड़ से ज्यादा बकाया, कर्मचारियों का वेतन देना भी हुआ मुश्किल

Mon, 07 Sep 2020 07:21 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • भाजपा का आरोप, आम आदमी पार्टी के दिल्ली की सत्ता में आते ही रोक दिया गया नगर निगमों का फंड
  • आम आदमी पार्टी ने कहा- भाजपा नहीं दे रही निगम कर्मचारियों का वेतन, नगर निगम का बजट पूर्ण, हम इसी बजट में चलाएंगे नगर निगम
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MCD Employees - फोटो : Amar Ujala (File)
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विस्तार
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दिल्ली नगर निगम चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन इसके लिए सियासी दांंव अभी से चले जाने शुरू हो गए हैं। भाजपा शासित तीनों नगर निगमों ने आरोप लगाया है कि दिल्ली सरकार उनका 10 हजार करोड़ से अधिक बकाया रकम नहीं दे रही है, जिससे वे अपने कर्मचारियों को वेतन नहीं दे पा रहे हैं और उनके स्वास्थ्य-शिक्षा की सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। वहीं आम आदमी पार्टी ने कहा है कि नगर निगम भ्रष्टाचार का अड्डा बन गए हैं। आप का कहना है कि भाजपा को नगर निगमों से इस्तीफा दे देना चाहिए और वे इसी बजट में निगमों का शासन बेहतर ढंंग से चलाकर दिखाएंगे।

किसका कितना हिस्सा

पांचवें दिल्ली वित्त आयोग ने यह निर्धारित किया था कि दिल्ली सरकार के कुल बजट का 12.5 फीसदी हिस्सा नगर निगमों को जाएगा। यह राशि पूर्वी दिल्ली नगर निगम, उत्तरी दिल्ली नगर निगम, दक्षिणी दिल्ली नगर निगम, एनडीएमसी और दिल्ली कैंटोनमेंट एरिया की निगम इकाई को एक निश्चित अनुपात में बांटा जाएगा। निगमों को जाने वाला धन तीन किस्तों में दिया जाता है। पहली किस्त अप्रैल, मई और जून महीने के लिए होगी। दूसरी किस्त जुलाई से दिसंबर तक (दो तिमाही का हिस्सा एक साथ दिया जाता है) और तीसरी किस्त जनवरी से मार्च तक के लिए होती है। इसके अलावा निगम अपने स्तर पर आय बढ़ाने के उपाय भी करते हैं, जिससे उनका खर्च चलता है। लेकिन उनकी आय का सबसे बड़ा साधन राज्य द्वारा मिली आर्थिक सहायता ही होती है।

किसका कितना बकाया

तीनों नगर निगमों (पूर्वी, उत्तरी और दक्षिणी) को मिलाकर दिल्ली सरकार पर 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है। पूर्वी दिल्ली नगर निगम की स्टैंडिंग कमेटी के पूर्व चेयरमैन संदीप कपूर ने अमर उजाला को बताया कि दिल्ली सरकार अपने बजट में निगमों के लिए जो धन आवंटित करती है, वह स्वयं वही बजट निगमों को नहीं दे रही है। वर्तमान वित्त वर्ष 2020-21 के लिए भी 1677 करोड़ रुपये का फंड निर्धारित किया गया था, लेकिन इसमें से अभी भी 1100 करोड़ तक का बजट बकाया है।

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कुल फंंड का लगभग 90 फीसदी हिस्सा 24 हजार कर्मचारियों को वेतन देने में निकल जाता है। शेष राशि से निगम स्कूलों में बच्चों का खर्च और साफ-सफाई अभियान, डेंगू-मलेरियारोधी अभियान चलाया जाता है। लेकिन फंड न मिलने से यह कार्य प्रभावित हो रहा है।

उत्तरी-दक्षिणी नगर निगमों को भी नहीं मिला बजट

भाजपा नेता प्रवीण शंकर कपूर के मुताबिक दिल्ली सरकार ने उत्तरी दिल्ली नगर निगम का 956.41 करोड़ रुपये का इस वर्ष का भुगतान नहीं किया है। इसी प्रकार दक्षिणी दिल्ली नगर निगम का 661.61 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है। इससे निगमों के शिक्षा-स्वास्थ्य के कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इसके अलावा कर्मचारियों को वेतन देना भी संभव नहीं हो रहा है जिससे गंभीर स्थिति पैदा हो गई है। उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल सरकार को राजनीति करने के लिए दिल्ली की गरीब जनता के बच्चों के शिक्षा-स्वास्थ्य से खिलवाड़ नहीं करना चाहिए और तत्काल निगमों का फंड रिलीज करना चाहिए।

आम आदमी पार्टी ने किया पलटवार

कालकाजी सीट से विधायक आतिशी मार्लेना ने भाजपा के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि नगर निगम भ्रष्टाचार का अड्डा बन गए हैं। उन्होंने कहा कि तीनों नगर निगमों ने 11 हजार करोड़ रुपये की राशि खर्च की है तो इसमें कर्मचारियों का वेतन क्यों नहीं दिया गया। भाजपा को बताना चाहिए कि उसने यह पैसा कहां और किस मद में खर्च किया। आतिशी ने कहा कि अगर भाजपा निगमों का शासन चलाने में सक्षम नहीं है, तो उसे निगम आम आदमी पार्टी को दे देना चाहिए। वे इसी बजट में तीनों निगमों को ज्यादा बेहतर ढंग से चलाकर दिखाएंगे।

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