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डीयू में छात्र बढ़े, नहीं बढ़े शिक्षक

Mon, 01 Dec 2014 02:01 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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दिल्ली विश्वविद्यालय में हर साल छात्रों की संख्या में तो इजाफा हो रहा है, लेकिन उस अनुपात में शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो रही है। वर्षों से तदर्थ, अस्थायी और अतिथि शिक्षकों के सहारे ही पढ़ाई हो रही है। खाली पड़े पदों में ज्यादातर एससी-एसटी, ओबीसी और अशक्त शिक्षकों के हैं। यह बैकलॉग लंबे समय से यूनिवर्सिटी और कॉलेजों ने नहीं भरा।
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डीयू में खाली पड़े पदों को भरने के लिए जनवरी और अप्रैल 2012 में केंद्रीय विश्वविद्यालयों को बैकलॉग पद भरने के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने यूजीसी को पत्र लिखा था। उसके बाद 19 मई 2014 को सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों को यूजीसी ने 2 जुलाई, 1997 के आधार पर रोस्टर बनाने को कहा। इसे वेबसाइट पर प्रदर्शित करने को भी कहा, लेकिन अब तक कहीं कुछ नहीं हुआ।

केंद्र सरकार ने शिक्षकों की नियुक्तियों में वर्ष 2007 से 27 फीसदी आरक्षण देने का प्रावधान किया है। इसके तहत डीयू के 47 कॉलेजों ने इन वर्ग के शिक्षकों को पहले चरण में 1282 पदों पर नियुक्तियां करने का आदेश दिया था। पहले चरण में नियुक्तियां पूरी होने पर दूसरे चरण में 2561 स्थायी पदों को भरने के निर्देश जारी किए थे, लेकिन इन्हें अब तक नहीं भरा गया।
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डीयू एससी-एसटी-ओबीसी फोरम के चेयरमैन प्रोफेसर हंसराज सुमन ने बताया है कि जिन कॉलेजों को पहले चरण में पद आवंटित हुए, उनमें 13 कॉलेज हैं। उन्होंने कहा कि इन पदों को नहीं भरने से लगता है कि ओबीसी की सीटों पर डीयू प्रशासन और कॉलेज लंबे समय तक एडहॉक रखना चाहता है। प्रोफेसर सुमन ने कहा कि अगर डीयू के 47 कॉलेज दूसरे चरण के पद छात्रों और शिक्षकों के अनुपात के आधार पर भरते हैं, तो ओबीसी शिक्षकों को केंद्र की आरक्षण नीति का लाभ मिल सकता है।
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