आमतौर पर ऐसी मान्यता है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले लोग बेहद प्रगतिशील यानि मॉडर्न होते हैं। यहां पढ़ने वाले पुरातन परंपराओं को सिर्फ इसलिए स्वीकार नहीं करते कि मेरे घर में ऐसा होता था इसलिए मुझे भी ऐसा करना चाहिए।
किसी भी धार्मिक या सामाजिक ट्रेडिशन को फॉलो करने से पहले इस बात की पूरी जांच करते हैं कि यह कितना लॉजिकल है।
ऐसे में अगर आप दिल्ली यूनिवर्सिटी के किसी कॉलेज में पढ़ती हैं और करवाचौथ का व्रत रखती हैं तो सोचिए इस प्रगतिशील कैंपस में आपको खुद को सही साबित करने के लिए कितने पापड़ बेलने पड़ेंगे।
आइए जानते हैं कि दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाली लड़कियां जो करवाचौथ का व्रत रखती हैं उन्हें खुद को सही साबित करने के लिए क्या-क्या बहाने करने पड़ते हैं।
'छोटे शहर से हूं इसलिए रखना पड़ता है'
डीयू स्टूडेंट भानू शर्मा अपनी एक साथी के बारे में बताते हैं कि वह अपने ब्वॉय फ्रेंड के लिए करवाचौथ का व्रत थी। दिन में एक बार वह बेहोश्ा भी हो गई। जब मैंने उससे पूछा कि आखिर इस व्रत का तुम्हारे रिलेशनशीप से क्या लेना है? तो उसने जवाब दिया कि मैं छोटे शहर से हूं ना।
वहां बचपन से ही लड़कियों को फास्ट रखने की आदत डाल देते हैं। इसलिए मेरी भी आदत है। अगले दिन वह रो रही थी। पूछने पर पता चला कि उसके ब्वॉय फ्रेंड ने करवाचौथ के दिन न तो उसे फोन किया, न ही उसे कोई मैसेज भेजा।
भानू का कहना है कि मुझे समझ में नहीं आया कि जब वह बचपन से व्रत रखने की आदी है तो बेहोश क्यों हुई। और अगर यह व्रत इतना असरदार है तो उसके ब्वॉय फ्रेंड पर इसका कोई असर क्यों नहीं पड़ा।
हंसराज में पढ़ने वाली रिचा कहती हैं कि यहां सभी इस बात पर बहस करते रहते हैं कि शादी नामक संस्था खत्म होने के कगार पर है और परंपराओं का पालन करना अंध-भक्ति है। जबकि सच्चाई है कि इनमें से ज्यादातर लोग असल में इन संस्थाओं या परंपराओं के बारे में कुछ जानते ही नहीं।
प्रेमी के लिए व्रत रखना उसे नीचा दिखाना है
रिचा कहती हैं कि ऐसी ही बड़ी-बड़ी बातें करने वाली अपनी एक फ्रेंड से जब उन्होंने करवाचौथ पर बात की तो उसने जवाब दिया कि अपने प्रेमी या पति के लिए व्रत रखना उसे नीचा दिखाना है। मैं तो व्रत इसलिए रखती हूं क्योंकि इस व्रत से औरत की शक्ति का पता चलता है। कोई पुरूष ऐसा व्रत रख ही नहीं सकता।
रामजस में ही पढ़ने वाली मीशिका का कहना है कि उनकी एक सीनियर ने उसे बताया कि वह भी करवाचौथ का व्रत रखती है लेकिन इसका उसके पति या प्रेमी से कोई लेना-देना नहीं है।
असल में वह व्रत रखती है क्योंकि इसी बहाने वह एक दिन की डाइटिंग कर लेती है और उसके पेट की पाचन क्रिया को भी इससे आराम मिल जाता है।
खुद को प्रगतिशील साबित करने में लगी कई लड़कियों ने भी इस बात को तो स्वीकार किया कि वह करवाचौथ का व्रत रखती हैं। लेकिन यह स्वीकार करने से डरती हैं कि यह व्रत उन्होंने अपने चाहने वाले की लंबी उम्र के लिए रखा है। खुद को मॉडर्न साबित करने वाली एक लड़की ने कहा कि इसी बहाने वह एक दिन का खाना बचाती हैं जिसे गरीबों में बांट देती हैं।
'दकियानूसी बातों में नहीं करती विश्वास'
उनका कहना है कि हम इस तरह की दकियानूसी बातों में विश्वास नहीं करते। हम तो यह व्रत रखते हैं ताकि कम से कम एक दिन किसी गरीब की मदद की जा सके।
बात यहीं खत्म नहीं होती। कई लड़कियों ने तो ये भी कहा कि वह करवा चौथ का व्रत रखती हैं क्योंकि बचपन में जब उन्होंने यह व्रत रखना शुरू किया तो वह नारीवादी आंदोलन और फेमिनिस्ट थ्योरी के बारे में जानती ही नहीं थी। अब चूंकि बचपन से आदत है सो रहना पड़ता है।
यह बेहद अजीब है कि एक तरफ तो डीयू में पढ़ने वाली लड़कियां खुद को मॉडर्न साबित करना चाहती हैं और दूसरी ओर करवाचौथ का व्रत भी रखती हैं लेकिन उसे स्वीकार करने से डरती हैं। क्या मॉडर्न बनने में करवाचौथ का व्रत बाधा है?
साभार: टीओआई