डीडीसीए मानहानि विवाद मामले में आप नेता दीपक वाजपेयी को हाईकोर्ट से झटका लगा है। हाईकोर्ट ने वाजपेयी की उस याचिका को खारिज कर दी है जिसमें निचली अदालत से जारी समन को चुनौती दी गई थी। वाजपेयी ने यह भी कहा था कि आरोप तय करने के मुद्दे पर निचली अदालत ने उनका पक्ष नहीं सुना था।
केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 21 दिसंबर 2015 को मुख्यमंत्री केजरीवाल समेत आप के छह नेताओं पर मानहानि का मुकदमा दायर किया था। इस मामले में अदालत ने केजरीवाल, दीपक वाजपेयी, आशुतोष, संजय सिंह, कुमार विश्वास, राघव चड्ढा को बतौर आरोपी समन जारी किया था।
जस्टिस आईएस मेहता ने अपने फैसले में कहा कि यह याचिका निचली अदालत के फैसले के 458 दिनों बाद दायर की गई। याचिका विलंब से दायर की गई लेकिन इसका कोई वाजिब कारण नहीं बताया गया है।
हाईकोर्ट ने 18 पन्नों के अपने फैसले में कहा कि याची ने निचली अदालत के नौ मार्च 2016, तीस जनवरी व 25 मार्च के फैसलों को चुनौती नहीं दी थी। कानून का अपने पक्ष में फायदा लेने के लिये काफी विलंब से याचिका दायर की गई है। इस नजरिए से यह याचिका कानून का दुरुपयोग है।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि निचली अदालत के फैसले की प्रमाणित कॉपी याची को इस साल 25 अप्रैल को मिल गई थी जबकि याचिका में कहा गया है यह कॉपी याची को जून में मिली थी। याची के वकील प्रशांत मेंदीरत्ता ने अपनी दलीलों में कहा कि याची निचली अदालत के क्षेत्राधिकार से बाहर स्थित स्थान पर रहता है।
इसके मद्देनजर निचली अदालत बिना पड़ताल के उसे समन जारी नहीं कर सकती। वहीं जेटली की ओर से बहस करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि याचिका विलंब से दायर की गई।
अर्जी में इसका कोई संतोषजनक कारण नहीं बताया गया। दूसरी ओर डीडीसीए मानहानि मामले में शुक्रवार को सीएमएम के ट्रेनिंग पर होने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी। केस की सुनवाई के लिए 15 दिसंबर 2017 की तारीख तय की गई है।