कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए भीड़भाड़ से बचने की सलाह दी जा रही है, लेकिन सुबह से शाम तक रोज यात्रियों के बीच में रहने वाले बस चालकों या कंडक्टरों को न ही मास्क और न सैनिटाइजर मुहैया कराए गए हैं।
कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए भीड़भाड़ से बचने की सलाह दी जा रही है, लेकिन सुबह से शाम तक रोज यात्रियों के बीच में रहने वाले बस चालकों या कंडक्टरों को न ही मास्क और न सैनिटाइजर मुहैया कराए गए हैं। ऐसे में रोजाना हजारों यात्रियों को गंतव्य तक सुरक्षित पहुंचाने वाले ड्राइवर और कंडक्टर खुद के लिए फिक्रमंद हैं। हैरत की बात यह है कि अब तक परिवहन विभाग की ओर से किसी भी कर्मी को सुरक्षा के लिए बुनियादी सुविधाएं भी नहीं दी गई हैं।
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बसों में यात्रा करने वाले कई यात्री मास्क लगाकर चल रहे हैं। खासकर एसी बसों में संक्रमण का अधिक खतरा होने के बावजूद एहतियात बरतने के लिए हिदायतें बस कर्मियों के लिए नाकाफी साबित हो रही हैं।
दो बस ड्राइवर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि रोजाना हर तरह के यात्रियों के बीच रहते हैं। फिर भी उन्हें ड्यूटी के दौरान अपनी सुरक्षा के लिए कोई सुविधा नहीं दी गई है। उन्हें भी इस बात की चिंता सता रही है कि अगर कोई परेशानी हुई तो परिवार की देखभाल कैसे करेंगे।
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कोरोना संक्रमित लोगों को ले जाने लाने के लिए डीटीसी बसों का इस्तेमाल किया जा रहा है। डीटीसी के सीजीएम बीआर मिन्हास ने कहा कि अभी सामान्य बसों में तैनात कर्मियों के लिए मास्क जरूरी नहीं है। विशेष बसों में तैनात कर्मियों की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं।