शहर में होने वाले उपद्रवों, आंदोलनों और वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान लोगों पर नजर रखने के लिए अब पुलिस ड्रोन का सहारा लेगी। जरूरत पड़ने पर वह ड्रोन में कैद तस्वीर के आधार पर उसकी फुटेज कोर्ट में भी पेश करेगी। पुलिस जल्द ही तीन ड्रोन खरीदने जा रही है। आयुक्त ने इसे खरीदने की स्वीकृति दे दी है।
नेशनल सिक्योरिटी गार्ड की तर्ज पर अब किसी भी तरह की सुरक्षा का जायजा लेने से पहले पुलिस ड्रोन की मदद लेगा। गुड़गांव में कई श्रमिक आंदोलनों में किसी न किसी वजह से हिंसा हो चुकी है। जाट आंदोलन का भी काफी असर रहा था।
इस तरह के मामलों पर नजर रखने के लिए पुलिस ड्रोन का इस्तेमाल करेगी। पौने दो लाख रुपये की कीमत वाले ड्रोन को एक किमी की दूरी तक भेजा जा सकता है। उसकी दो बैट्री पर एक बार में 28 मिनट तक की फिल्म कैद करने की क्षमता होगी।
ड्रोन का अपना कंट्रोलर होता है, जिसके पास लगे कंप्यूटर में कैद होने वाली तस्वीरों को लाइव देखा जा सकता है। पुलिस आयुक्त नवदीप सिंह विर्क ने कमिश्नरी के सभी डीसीपी के साथ ड्रोन का ट्रायल ले लिया है। इसके बाद उन्होंने डीसीपी हेडक्वार्टर को इसे खरीदने को कहा है।
तस्वीरें बताएगी घटनाओं का सच
ड्रोन खरीदने का उद्देश्य यह है कि वह मौके पर कैद होने वाली तस्वीरों को कंट्रोल रूम को देगा, जहां उसे देख कर पुलिस अपना अगला कदम उठाएगी। बहुत से आंदोलनों या अन्य स्थान पर लोग मौजूद न रहने की बात करते हैं। तस्वीर के आधार पर सच से पर्दा उठ जाएगा।
खास बातें
एक किमी की दूरी तक का रिकॉर्ड करने की क्षमता है।
: एक बार में दो बैट्री लगती हैं, जिसे 28 मिनट तक चलाया जा सकता है।
: बैट्री बदलकर रिकार्डिंग दोबारा की जा सकती है।
: कंपनी के ऑपरेटर इसे चलाएंगे। बाद में पुलिस उसका प्रशिक्षण लेगी।
पुलिस को हाईटेक करने व गुड़गांव की आवश्यकताओं के कारण पुलिस को ड्रोन से लैस किया जा रहा है। जल्द ही इसे खरीदा जाएगा।
-विक्रम कपूर, डीसीपी, मुख्यालय गुड़गांव पुलिस