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बार कोड में होगी चालक और वाहन की कुंडली

Sat, 08 Jul 2017 10:09 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरुग्राम
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ड्राइविंग लाइसेंस
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प्रदेश के विभिन्न जिलों में दौड़ने वाले वाहनों और मालिकों की पहचान करना आसान हो गया है। हरियाणा स्वर्ण जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में परिवहन विभाग जारी करने वाले ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) और रजिस्ट्रेशन कार्ड (आरसी) में बार कोड का उपयोग करना शुरू कर दिया है। साथ ही इसे आधार से भी जोड़ा जा रहा है। इस बार कोड के जरिए वाहनों और उनके मालिकों की जानकारी करना आसान हो गया है। 
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इसे नेशनल सर्वर से जोडने के कारण देश के किसी भी हिस्से में बैठकर वाहन और उसके मालिक की जानकारी आसानी से प्राप्त की जा सकती है। इसका सबसे बड़ा लाभ घटना- दुर्घटना में प्रयुक्त वाहन और उसके मालिक की तलाश करना पुलिस के आसान होगा। 

बता दें कि पहले प्रदेश के विभिन्न जिलों में बनने वाले डीएल और आरसी में बार कोड नहीं होता था। और न ही उसे आधार नंबर से लिंक किया जाता था। इससे लोग गलत पते पर अपने वाहनों का पंजीकरण करा लेते थे। कई बार गलत पता होने के कारण वाहन मालिकों की जानकारी करना मुश्किल होता था। 
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यही नहीं कार्ड का प्रिंट भी हलका होने के कारण नाम और पता कई बार और पंजीकरण संख्या गायब हो जाती थी। लेकिन बार कोड से ये संभव नहीं होगा। बार कोड में ही वाहन और उसके मालिक की पूरी कुंडली उपलब्ध होगी। कार्ड रीडर के जरिए प्रदेशभर के किसी भी वाहन और उसके मालिक की जानकारी आसानी से की जा सकती है।

पहले घटना-दुर्घटना होने पर वाहन चालक गलत पते पर बनवाए डीएल को पुलिस को सौपकर गायब हो जाता था। फिर उसे तलाश करना आसान नहीं होता था। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। बार कोड लगे होने और उसे आधार से लिंक होने के कारण अब गलत पते पर डीएल नहीं बनवाया जा सकता है। यही नहीं आरसी में भी बार कोड होने से असली वाहन मालिक तक पहुंचना आसान हो गया है। 

बार कोड से जानकारी एकत्र करने के लिए कार्ड रीडर की जरूरत होगी। बार कोड वाले डीएल व आरसी गुरुग्राम में बनना शुरू हो गया है। खास बात ये है कि इस डीएल व आरसी में हरियाणा स्वर्ण जयंती उत्सव का प्रतीक चिन्ह भी अंकित किया जा रहा है।

मोबाइल से भी किया जा सकता है डाउनलोड:
अपने मोबाइल के प्ले स्टोर में जाकर उसमें क्यूआर बार कोड स्क्ैनर को डाउनलोड किया जा सकता है। इसके बाद मोबाइल से ही बार कोड को स्कैन कर सभी जानकारी घर बैठे आसानी से ली जा सकती है।

डिजिटल इंडिया के तहत सरकार के निर्देश पर विभाग ने ये कदम उठाया है। ये तकनीक बेहद सुरक्षित और लाभकारी है। अब फर्जी पते पर डीएल बनवाना और वाहनों का पंजीकरण कराना आसान नहीं होगा। क्योंकि उसे आधार नंबर से लिंक किया जा रहा है।
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-भारत भूषण गोगिया, एसडीएम, गुरुग्राम।
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