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एम्स प्रशासन को तब ई-मेल क्यों कर रहे थे थरूर?

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सुनंदा पुष्कर की मौत मामले में उनके पति मंत्री शशि थरूर नये सिरे से घिरते नजर आ रहे हैं। अंग्रेजी न्यूज चैनल 'टाइम्स नाउ' के अनुसार शशि थरूर उन दिनों एम्स प्रसाशन के संपर्क में थे, जिन दिनों सुनंदा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार की जा रही थी।
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साथ ही वह ई-मेल भेजकर यह सुनिश्चित करने में लगे थे कि सुनंदा की मौत में किसी का कोई हाथ नहीं है। उनकी मौत प्राकृतिक वजहों से हुई है।

हालांकि अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है कि ये ई-मेल शशि थरूर के ही हैं। अगर इसकी पुष्टि होती है तो पूर्व केंद्रीय मंत्री थरूर बड़ी मुश्किल में फंस सकते हैं।

तीन से क्यों कुछ नहीं खाया था सुनंदा ने

'टाइम्स नाउ' के मुताबिक एम्स के डायरेक्टर को 26 जनवरी, 2014 को रात 09.52 बजे भेजी गई है। इसमें लिखा है कि मैं एम्स के डॉक्टर मिश्रा के ध्यान में हम दोनों के कॉमन फ्रेंड अनिल चट्टा के जरिए एक जानकारी लाना चाहता हूं। मुझे याद है कि आपने आशंका जाहिर की थी कि सही मात्रा में पानी और नमक न लेने से से उसका ब्लड प्रेशर खतरनाक ढंग से गिर सकता है। हो सकता है कि उसके साथ यही हुआ हो, क्योंकि वह दो-तीन दिन से ढंग से खा-पी नहीं रही थी।

यह भी हो सकता है कि अगर उसने ऐल्प्रेक्स ली हो तो इससे उसकी हार्ट बीट और भी कम हो गई हो। इससे उसे मदद के लिए कोशिश करने में दिक्कत हुई होगी। अगर उसने तीन दिन तक खाना नहीं खाया और सिर्फ नारियल पानी पिया है तो इससे उसके शरीर में पोटाशियम की मात्रा बढ़ गई होगी, क्योंकि नारियाल में पोटैशियम ज्यादा होता है। इससे उसके दिल के धड़कने की रफ्तार कमजोर पड़ गई होगी।

पुलिस को नहीं मिले ईमेल

दिल्ली पुलिस आयुक्त ने कहा कि  मामले के सभी तथ्यों की विस्तृत और सभी कोणों से जांच हो रही है। इसी कारण जांच में वक्त लग रहा है।

उन्होंने कहा कि डॉ. गुप्ता द्वारा केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन को भेजे गए मेल दिल्ली पुलिस को नहीं मिले हैं। माना जा रहा है कि पुलिस को मेल मिलते हैं तो उस आधार पर डा. गुप्ता से पूछताछ की जा सकती है।

पूछताछ के लिए शशि थरूर को भी नोटिस भेजा जा सकता है। पुलिस आयुक्त ने कहा कि  जांच अभी जारी है और जरूरत पड़ने पर उनको पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है। जब तक पुलिस क्लोजर रिपोर्ट दाखिल नहीं करती तब तक किसी को क्लीन चिट नहीं दी जा सकती।

थरूर को मिल सकता है नोटिस

दिल्ली पुलिस सुनंदा पुष्कर मौत मामले में जल्द ही पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर को पूछताछ के लिए नोटिस भेज सकती है।

एम्स के वरिष्ठ फोरेंसिक चिकित्सक डॉ. सुधीर गुप्ता द्वारा सुनंदा पुष्कर की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में फेरबदल करने के लिए दबाव डालने के आरोपों के बाद पुलिस की तफ्तीश में नया मोड़ आ गया है।

दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस आयुक्त भीमसेन बस्सी को बृहस्पतिवार सुबह फिर गृह मंत्रालय में तलब किया गया था। हालांकि इस बात का खुलासा नहीं हो पाया कि उन्हें क्यों बुलाया गया था।

बयान पर कायम हैं डॉ. गुप्ता

सुनंदा पुष्कर और नीडो तानिया के पोस्टमार्टम रिपोर्ट बदलने के लिए दबाव डाले जाने का आरोप लगाकर सनसनी फैलाने वाले एम्स फोरेंसिक विभाग के प्रमुख डॉ. सुधीर गुप्ता अब भी अपने बयान पर कायम हैं।

उन्होंने कहा कि अपनी बात मीडिया और एम्स प्रशासन के सामने रखने की अनुमति मांगी है।

प्रोटोकॉल के तहत वे सीधे तौर पर मीडिया से बातचीत करने के लिए अधिकृत नहीं हैं। इसलिए एम्स प्रशासन से अनुमति की मांग की है। हालांकि पहले भी मीडिया में बयान देकर वे चर्चा में रहे हैं।

सिर्फ सॉरी और थैंक्यू ही बोलते रहे

बृहस्पतिवार सुबह तक मीडिया से बातचीत कर रहे एम्स फोरेंसिक विभाग के प्रमुख डॉ. गुप्ता ने शाम होते-होते चुप्पी साध ली।

पांच बजे तक उनसे बातचीत करने के लिए मीडियाकर्मी उनके कार्यालय के सामने डटे रहे, लेकिन जब साढ़े पांच बजे के बाद वे अपने कार्यालय से निकले तो मीडिया के सवालों के जवाब में सॉरी, थैंक्यू और नो कमेंट करते हुए अपनी गाड़ी में बैठकर रवाना हो गए।

इससे पहले बृहस्पतिवार सुबह उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनकी बात को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट से छेड़छाड़ नहीं

उन्होंने कहा कि सुनंदा पुष्कर अथवा उनकी ओर से बनायी गई किसी भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं हुई है।

मेडिकल स्टैंडर्ड और एथिक्स के अनुसार रिपोर्ट तैयार की गई।

उन्होंने कहा कि सुनंदा पुष्कर और नीडो तानिया के पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने में उनके ऊपर कई जगह से दबाव थे, लेकिन रिपोर्ट बनाने में प्रोफेशनल और एथिकल स्टैंड अपनाया गया।

क्या था पोस्टमार्टम रिपोर्ट में

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पहला शब्द लिखा है यह केस प्वायजनिंग का है। परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर लगता है कि एलप्रेक्स दवा की वजह से शरीर में जहर बना।

शरीर पर चोट के 15 निशान मिले थे, लेकिन चोट ऐसे नहीं थे कि उससे जान चली जाए। 15 चोट में एक निशान इंजेक्शन और एक दांत काटने का था। रिपोर्ट में शरीर पर लगी चोट 12 घंटे से चार दिनों के बीच की बताई गई है।

पोस्टमार्टम तीन डॉक्टरों के मेडिकल बोर्ड ने किया था। जिसमें डॉ. सुधीर गुप्ता के अलावा एडिशनल प्रोफेसर डॉ. आदर्श कुमार और सीनियर रेजिडेंट डॉ. शशांक पुनिया शामिल थे।
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जांच के लिए सीएफएसएल भेजा गया

पोस्टमार्टम के बाद मौत के कारणों की और गहराई से जांच के लिए विसरा, मस्तिष्क, हृदय, किडनी और लिवर के अंश को जांच के लिए सीएफएसएल भेजा गया था। विसरा जांच में कहीं से जहर का कोई अंश नहीं होने की बात कही गई।

सूत्रों के मुताबिक एम्स फोरेंसिक विभाग के प्रमुख डॉ. सुधीर गुप्ता पहले भी चर्चा में रहे हैं। मीडिया में बयान देने पर पहले भी इनकी खिंचाई हुई है।

सूत्रों के मुताबिक एक मामले में इनके खिलाफ विजिलेंस विभाग को शिकायत भी मिली है। करीब दो वर्ष पूर्व किसी अन्य डॉक्टर के पोस्टमार्टम करने के बाद डॉ. गुप्ता ने बयान दिया था। यह मामला भी काफी चर्चा में रहा।
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