नई दिल्ली। राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की 140वीं जयंती के अवसर पर झांसी में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी, कवि सम्मेलन व सम्मान समारोह में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव व भारतीय विरासत विश्वविद्यालय, नोएडा के कुलपति डॉ. सच्चिदानंद जोशी को वर्ष 2026 का राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त सम्मान प्रदान किया गया। समारोह दीनदयाल उपाध्याय सभागार में हुआ।
सम्मान प्राप्त करने के बाद डॉ. जोशी ने इसे व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय भाषा, संस्कृति व राष्ट्रीय चेतना की साधना का सम्मान बताया। उन्होंने कहा कि मैथिलीशरण गुप्त ने अपने साहित्य से भारत के आत्मबोध को शब्द दिए। यह सम्मान सांस्कृतिक दायित्व की याद दिलाता है।
राष्ट्रकवि के पौत्र डॉ. वैभव गुप्त ने बताया कि यह सम्मान पहले डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी, डॉ. अवध किशोर जड़िया व मैत्रेयी पुष्पा को भी मिल चुका है। भारतीय ज्ञान परंपरा में राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त का प्रदेय विषयक संगोष्ठी में 200 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। विद्यार्थियों के लिए निबंध, भाषण व काव्य प्रतियोगिताएं भी हुईं। शोध-पत्रों को जर्नल में प्रकाशित करने की योजना है। संवाद