Dr. Rahul
मालती देवी को लगभग लकवाग्रस्त हालत में डॉ राहुल गुप्ता, अतिरिक्त निदेशक, न्यूरोसर्जरी विभाग, फोर्टिस अस्पताल, नोएडा लाया गया था। उनकी पीठ में हर समय तेज दर्द रहता था जिसकी वजह से चलना-फिलना तो दूर वे अपने हाथ-पैर हिलाने में भी समर्थ नहीं थी। मरीज की जांच करने के बाद डॉ गुप्ता ने पाया कि उनका शक सही निकला और मालती देवी मेरूदंड के तपेदिक से ग्रस्त थी। उन्हें तत्काल शल्यचिकित्सा की जरूरत थी।
डॉ राहुल गुप्ता ने कहा कि टीबी आमतौर पर फेफड़ों और गले से संबंधित रोग है। लेकिन बहुत कम लोग यह समझ पाते हैं कि यह रोग शरीर के अन्य हिस्सों को भी प्रभावित कर सकता है। जब कोई व्यक्ति टीबी के बैक्टीरिया से संक्रमित हवा को श्वास के जरिए अपने शरीर में उतारता है तो बैक्टीरिया उसके फेफड़ों में बस जाता है और वहां पनपने लगता है।
डॉ राहुल गुप्ता ने कहा कि शुरूआती चरण में स्पाइनल टीबी का पता लगाना काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके बाद ही समुचित उपचार शुरू हो सकता है जिससे स्पाइनल ट्यूबरक्लॉसिस का पूरी तरह इलाज किया जा सकता है। लेकिन यदि ऐसा मरीज़ लकवाग्रस्त हो जाता है तो ऐसे में शल्यचिकित्सा के बावजूद उपचार मुमकिन नहीं होता।