कोरोना संक्रमण से जिंदगी की जंग लड़ने के बाद भी कई लोग प्लाज्मा दान देने के लिए आगे नहीं आ रहे। ऐसे लोगों को प्रेरित करने के लिए एशियन अस्पताल के डॉ. मनु शांगले अपने आप में एक मिसाल के रूप में उभरे हैं।
डॉ. मनु संक्रमण के कारण जिंदगी की जंग लड़ रहे लोगों का इंटेंसिव केयर यूनिट में (आईसीयू) में पर्यवेक्षण करते हैं। वहीं, अब 30 दिन में दो बार प्लाज्मा दान कर चुके हैं। वह संक्रमण से जूझ रहे लोगों की जिंदगी बचाने के लिए स्वस्थ हुए मरीजों को भी प्लाजमा दान करने के लिए लगातार प्रेरित कर रहे हैं। इसलिए स्वयं उनकी प्रेरणा बन रहे हैं।
सेक्टर-31 निवासी डॉ. मनु बताते हैं कि मार्च से वह कोविड-19 की ड्यूटी दे रहे हैं। ड्यूटी के दौरान न केवल वह बल्कि उनके जरिए पूरा परिवार संक्रमण की चपेट में आया। इसलिए वह अपनों के जूझने का दर्द समझते हैं। हालांकि डॉ. मनु के परिवार ने हर वक्त उनकी हौसला अफजाई ही की है।
डॉ. मनु बताते हैं कि उनका ब्लड ग्रुप ओ पॉजिटिव है। इस कारण वह किसी को भी प्लाज्मा दान कर सकते हैं। वह जून के आखिरी सप्ताह में संक्रमित हुए थे। 20 दिन के उपचार के बाद वह स्वस्थ हो सके। जुलाई के आखिरी सप्ताह में उन्होंने अस्पताल में एक मरीज की जान बचाने के लिए पहली बार प्लाज्मा दान किया। चूंकि संक्रमित तीन माह तक प्लाज्मा दान कर सकता है। ऐसे में हाल ही में फिर से उन्होंने दोबारा प्लाज्मा दान किया है।