प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विजय गोयल का जाना अब तय माना जा रहा है। पार्टी ने उन्हें राज्यसभा सांसद बनाकर यह पहले ही संकेत दे दिया था कि उन्हें लोकसभा चुनाव की जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया जाएगा।
उधर चर्चा गर्म है कि दिल्ली विधानसभा नेता प्रतिपक्ष डॉ. हर्षवर्धन एक बार फिर प्रदेश अध्यक्ष का कार्यभार संभालेंगे। यह माना जा रहा है कि भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतिन गडकरी इसकी घोषणा जल्द ही करेंगे।
डॉ. हर्षवर्धन को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने पर भाजपा के राष्ट्रीय नेताओं ने भी करीब-करीब सर्वसम्मति बना चुके है। पार्टी के भीतर भी पिछले कई दिनों से प्रदेश अध्यक्ष बनाने पर लगातार चर्चा चल रही थी। कई नाम पर भी चर्चा हुई जिसमें आशीष सूद, सतीश उपाध्याय, पवन शर्मा समेत कई भाजपा नेताओं पर चर्चा की गई।
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लेकिन लोकसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी किसी अनुभवी नेता को प्रदेश का प्रभार देना चाह रही है। ऐसे में डॉ. हर्षवर्धन का कद काफी बड़ा है। हर्षवर्धन पांच बार से लगातार विधायक भी है। इतना ही नहीं उन्हें चुनाव लड़वाने का भी अनुभव है। हालांकि डॉ. हर्षवर्धन ने इस बात की अभी पुष्टि नहीं की है।
भाजपा सूत्रों की अगर माने तो आम आदमी के दिल्ली में बढ़ते प्रभाव के कारण प्रदेश अध्यक्ष का पद संभालना बेहद ही चुनौती भरा है। क्योंकि अगर लोकसभा चुनाव में पार्टी ने खराब प्रदर्शन किया तो भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के नाराजगी का भी सामना करना पड़ सकता है।
ऐसी स्थिति में अपनी तरफ से भाजपा का कोई भी दिग्गज नेता इस पद को संभालने के लिए आगे नहीं बढ़ रहा है। अब देखना है कि पार्टी आलाकमान किसे इस पद पर नियुक्त करती है। उल्लेखनीय है कि विजय गोयल पिछले साल फरवरी में ही प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किए गए थे।
उनका तीन साल का कार्यकाल भी पूरा नहीं हुआ है। हालांकि पार्टी ने राज्ससभा से सांसद बनाकर यह संकेत पहले ही दे चुकी है कि प्रदेश अध्यक्ष के पद पर किसी दूसरे को नियुक्त किया जाएगा। पार्टी में एक व्यक्ति दो पद पर नहीं रहने का भी प्रावधान है।