नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को एक याचिकाकर्ता को अखबार की खबरों के आधार पर जनहित याचिका (पीआईएल) दायर करने के खिलाफ चेतावनी दी। अदालत ने कहा कि याचिका दायर करने से पहले होमवर्क करना जरूरी है। मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने यह टिप्पणी एक याचिका को खारिज करते हुए की जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और उनके सहयोगी संस्थानों के लिए बाहरी भर्ती कंपनियों या एजेंटों के नियमन की मांग की गई थी।
याचिका में कैन फिन होम्स लिमिटेड की भर्ती में कथित अनियमितताओं की सेबी या सीबीआई से स्वतंत्र जांच की मांग भी की गई थी। कैन फिन होम्स लिमिटेड कैनरा बैंक के प्रबंधन नियंत्रण में एक सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध कंपनी है। खंडपीठ ने याचिका को आधा-अधूरा करार दिया। मुख्य न्यायाधीश ने अखबार की खबरों के सबूत मूल्य पर सवाल उठाते हुए कहा कि अखबार की खबर का सबूत मूल्य क्या है? पहले शोध करें। इस तरह की याचिकाएं एक या दो खबरों को पढ़कर दायर की जाती हैं। अखबार पढ़ने के बाद क्या आपकी कल्पना को पंख लग जाते हैं? कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा कि अगर कोई अपराध था तो उन्होंने सेबी या भारतीय रिजर्व बैंक से संपर्क क्यों नहीं किया। न्यायाधीश ने आगे सुझाव दिया कि याचिकाकर्ता को जनहित याचिका कानून को हल्के में नहीं लेना चाहिए। उन्होंने कहा, एक ट्रेंड चल रहा है कि एक-दो जानकारी, ज्यादातर अखबार की खबरें, इकट्ठा करके पीआईएल दायर कर दी जाती है और फिर अदालत या अन्य पक्षों से सबूत पेश करने की मांग की जाती है। आपको अपना होमवर्क खुद करना होगा। अखबार पढ़कर अदालत में ना आएं।