एक आठ साल की बच्ची अब कभी सोना नहीं चाहती है। आप सोच रहे होंगे कि ऐसा क्यों है कि वो अब कभी सोना ही नहीं चाहती क्योंकि आंख बंद करने से ही उसे उस हैवान की शक्ल नजर आने लगती है जिसने आठ साल की मासूम बच्ची के साथ जन्माष्टमी के दिन मंदिर जैसी पवित्र जगह पर रेप जैसी घिनौनी हरकत की थी।
गौरतलब है कि दक्षिणी दिल्ली के एक झुग्गी में रहने वाली आठ साल की बच्ची से एक 70 वर्षीय पुजारी ने रेप किया था। इस घटना को 15 दिन हो गए हैं पर बच्ची को उस हादसे को बार-बार याद करना पड़ता है।
हिन्दुस्तान टाइम्स अंग्रेजी वेबसाइट की एक खबर के अनुसार कभी पुलिस को स्टेटमेंट देते वक्त, कभी उस अपराधी की शिनाख्त करने के लिए तो कभी पत्रकारों के सवालों का जवाब देने के लिए। मालूम हो कि आरोपी बाबा विश्वबंधु ने 18 अगस्त को जन्माष्टमी के दिन बच्ची और उसकी सात साल की दोस्त के साथ रेप किया था।
आरोपी पुजारी लड़की के गांव का एक भरोसेमंद व्यक्ति है जो पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय से वहां रह रहा है। उसपर आरोप है कि वो दोनों बच्चियों को पिछले एक हफ्ते से प्रताड़ित कर रहा है।
इस केस की सुनवाई साकेत कोर्ट में जिला जज के सामने शुरू हो गई है। बच्ची पुजारी से इतनी डरी हुई है और ऐसे में पहले ही उसे दो बार आरोपी का सामना करना पड़ा है। एक बार तो पहचान परेड के दौरान और एक बार जब आरोपी पुजारी को 19 अगस्त को जेल भेजा जा रहा था।
मंदिर को देखकर रो पड़ती है मां
बच्ची अपराधी पुजारी से 15 दिन बाद भी बहुत डरी हुई है और उस सदमें से वापस नहीं आ पा रही है। इस घटना का पता बच्ची के माता पिता को तब चला जब उसने अपने शरीर के कुछ अंगों में दर्द होने और पेशाब होने में तकलीफ की बातें बताते बताते रोते हुए सारी घटना अपनी मां को बताई।
बच्ची की मां घरों में काम करती है और उसके पिता खाना बनाने का काम करते हैं। वह मंदिर जहां ये शर्मनाक घटना हुई थी वो बच्ची की झुग्गी से बहुत पास में है। बच्ची की मां अपना दुख बयान करते हुए कहती है कि हर बार जब वह उस मंदिर को देखती है उसे रोना आता है।
एक सामुदायिक सदस्य और टीचर जो इन दोनों दोनों बच्चियों और उनके परिवारों को कांउसिल कर रहे हैं कहते हैं कि यहां रहने वाले सभी लोग सदमे में है। आरोपी यहां पिछले 10 साल से भी ज्यादा समय से हमारे बीच रह रहा है, ऐसे में लोगों के ऊपर क्या बीत रही होगी इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
पत्रकारों के बार-बार गांव में आने की वजह से उक्त टीचर ने पहले ही कुछ दिनों के लिए बच्चियों और उनके परिवार को कहीं और रहने भेज दिया है, जिससे उन्हें उस सदमें से हर बार न गुजरना पड़े। टीचर ने बताया कि बच्ची और उसके परिवार वाले धीरे-धीरे इस सदमें से उबर रहे हैं। आरोपी पुजारी विश्वबंधु को 18 अगस्त को गिरफ्तार कर लिया गया था और मजिस्ट्रेट श्रेया अरोड़ा के समक्ष पेश किए जाने के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।
गौरतलब है कि पिछले कुछ सालों में दिल्ली में बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों की संख्या काफी बढी है और ये पूरे देश में बच्चों के लिए सबसे असुरक्षित शहर बन गया है। 2003 ले 2013 के बीच में चाइल्ड रेप केसों में 5 गुना की वृद्धि हुई है जो संख्या में 140 से 757 हो गए हैं।
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के 2014 में आए आंकड़ों के अनुसार देशभर में 2013 में बच्चों के खिलाफ अपराध के 58,224 मामले दर्ज हुए हैं, जो पिछले साल से 52.5% ज्यादा हैं। 2012 रेप केस के बाद बनाए गए सख्त कानूनों के बावजूद औरतों के रेप और प्रताड़ना के मामले राजधानी में सबसे अधिक रहे हैं।