खेल परिसर में कुत्ते के काटे जाने की घटना के बाद खिलाड़ी काफी डरे हुए थे। इसकी सूचना खिलाड़ियों ने नगर निगम को भी दे दी थी, मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
मंगलवार को परिसर में अभ्यास कर रहे तीरंदाजी खिलाड़ियों पर भी पागल कुत्ते ने हमला कर दिया। इस पर खेल परिसर में ही निर्माणाधीन इंडोर स्टेडियम में काम कर रहे मजदूरों व खिलाड़ियों ने लाठी डंडों से हमला कर कुत्ते को मार दिया।
नगर निगम के पास नहीं हैं कोई इंतजाम
नगर निगम के पास लावारिस कुत्तों को पकड़ने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि वे कुत्तों को पकड़ कर उन्हें कहीं और नहीं छोड़ सकते हैं।
ऐसे में केवल उनकी नसबंदी करना ही एक विकल्प है। मगर उसके लिए भी नगर निगम ने अभी तक कुछ नहीं किया है। नगर निगम ने लावारिस कुत्तों की संख्या में कमी लाने के लिए उनकी नसबंदी करवानी है।
इसके लिए कमेटी ने उसका बजट आदि तय करना है, मगर पिछले कई माह से कमेटी गठित करने के लिए भी बैठक नहीं हो पाई है। महापौर सुमन बाला का कहना है कि नगर निगम लावारिस जानवरों से शहरवासियों को निजात दिलाने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि वे जल्द ही अधिकारियों की बैठक बुलाकर इस गंभीर मामले का कोई न कोई समाधान अवश्य निकालेंगी।
शहर के सबसे बड़े बादशाह खान सिविल अस्पताल में इस साल फरवरी माह के आखिरी सप्ताह में रैबीज के इंजेक्शन समाप्त हो चुके हैं। उसके बाद से अस्पताल में इंजेक्शन नहीं आए हैं।
ऐसे में 18 लाख की आबादी वाले इस शहर के अस्पताल में कुत्ते या बंदर के काटे जाने पर इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों को डॉक्टर इंजेक्शन बाजार से लाने के लिए भेज देते हैं।
बाजार में एक इंजेक्शन की कीमत 350 से 400 रुपये है। कुत्ते या बंदर के काटने पर रैबीज के तीन इंजेक्शन का कोर्स होता है। रोजाना बीके में 25 से 30 मरीज कुत्ते या बंदर के काटने के आते हैं।
ऐसे में हर कोई इतने महंगे इंजेक्शन नहीं ले पाता है, मगर मजबूरी में उसे बाहर से इंजेक्शन खरीदने पड़ते हैं।