फरीदाबाद के निजी स्कूलों में फीस वृद्धि के मामले पर अब हरियाणा अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (हुडा) के अधिकारियाें की मुसीबत बढ़ने वाली है। हरियाणा अभिभावक एकता मंच उन 40 निजी स्कूलों से जवाब मांगेगा, जिन्हें 20 प्रतिशत गरीब व प्रतिभाशाली बच्चों को मुफ्त पढ़ाने के नाम पर सस्ती जमीन उपलब्ध कराई गई है।
मंच यह पूछेगा कि इनमें से कितने स्कूलों में गरीब बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। जिनमें ऐसा नहीं किया जा रहा है उनके खिलाफ विभाग ने क्या कार्रवाई की। अगर नियम तोड़ने वाले स्कूलों पर हुडा ने कार्रवाई नहीं की है, तो उसे भी कोर्ट में पार्टी बनाया जाएगा।
मंच के प्रदेश महासचिव कैलाश शर्मा ने बताया कि पिछले कई दिनों से निजी स्कूलों के मसले पर बातचीत के लिए मंच की इकाई को बुलाने का आग्रह हुडा प्रशासक से किया जा रहा है, लेकिन हुडा प्रशासक ने बुलाया नहीं।
उन्होंने बताया कि हुडा की ओर से निजी स्कूलों ने 30 शर्तों के आधार पर सस्ती जमीन हासिल की है। उसमें से एक भी शर्त को पूरा नहीं किया जा रहा है। ऐसे में नियमों का उल्लंघन करने पर निजी स्कूलों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
जमीन देने से पहले प्रमुख शर्तें
-अपने स्कूल की दाखिला पॉलिसी व फीस संरचना शिक्षा सत्र शुरू होने से पहले हुडा को देनी होगी।
-स्कूल की मैनेजमेंट कमेटी में हुडा का एक अधिकारी शामिल होगा, जिस क्षेत्र में स्कूल खुला है, उस क्षेत्र के बच्चों को पहले दाखिला देना होगा।
-गरीब, पिछड़े व मेधावी छात्रों को 20 प्रतिशत दाखिला देकर उनसे सरकारी स्कूलों की भांति फीस लेनी होगी।
-अपने स्कूल में मंजूर किए गए नक्शे से ज्यादा कोई भी निर्माण नहीं करना होगा, जिस कक्षा तक स्कूल चलाने की अनुमति मिली है, उतनी कक्षा तक ही स्कूल चलाना होगा।
-अपने स्कूल के अंदर किसी भी प्रकार की दुकान/कोचिंग सेंटर, स्वीमिंग पूल, स्टेडियम, रिहायशी मकान/फ्लैट आदि अन्य किसी प्रकार की व्यवसायिक गतिविधियां नहीं चलाई जाएंगी।