निर्भया मामले में दोषियों को सजा मिलने के बाद निर्भया के माता-पिता
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हैवानियत की शिकार हुई युवती का इलाज कर रहे सफदरजंग अस्पताल के चिकित्सकों ने कहा था कि जीवन के अंतिम समय तक पीड़िता में जीने का जज्बा था और उसने हिम्मत बनाए रखी थी। लेकिन उसे चिकित्सा विज्ञान बचा नहीं पाया।
इलाज कर रहे अनुभवी चिकित्सकों ने कहा था कि ऐसा मामला उन लोगों ने अपने 30 से 35 वर्ष के चिकित्सीय जीवन में कभी नहीं देखा था और न ही यह सोचा था कि ऐसा मामला भी उनके चिकित्सीय जीवन में आएगा।
पीड़िता के इलाज करने वाली टीम में शामिल सफदरजंग अस्पताल की स्त्री और प्रसूति रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. अरुणा बत्रा ने कहा था कि 30 वर्ष के अपने चिकित्सीय पेशे में इस तरह का दर्दनाक मामला कभी नहीं देखा।
सर्जरी विभाग के प्रमुख रहे डॉ. सुनील जैन ने भी कहा था कि ऐसा केस पहले नहीं देखा। पीड़ित युवती की हिम्मत और जज्बे को सिंगापुर स्थित माउंट एलिजाबेथ अस्पताल के चिकित्सकों ने भी तारीफ की थी। अमर-उजाला को भेजे ई-मेल में अस्पताल की ओर से कहा गया था कि युवती काफी बहादुर थी।