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हेमी ट्रंक्स पीड़ित तंजानिया के बच्चे को लगाई गाय की नस, जन्म से ही नहीं है एक तरफ का फेफड़ा

Sat, 07 Jul 2018 08:08 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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फाइल फोटो
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हेमी ट्रंक्स पीड़ित तंजानिया के एक बच्चे को डॉक्टरों ने गाय की वेन लगाकर संजीवनी दी है। दिल्ली के अपोलो अस्पताल में इस बच्चे का सफल आपरेशन हुआ। डॉक्टरों के अनुसार बच्चे का जन्म से ही एक तरफ का फेफड़ा नहीं है।

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सीधी तरफ रक्त धमनियां भी नहीं हैं। इसकी वजह से बच्चे का दिल एक ओर चला गया था। चूंकि फेफड़े का प्रत्यारोपण करना फिलहाल संभव नहीं था। इसलिए डॉक्टरों ने इस एक वर्षीय बच्चे का जीवन दिल का आपरेशन कर बचा लिया है।

वरिष्ठ डॉ. मुथु जोथी ने बताया कि एक वर्षीय फैरवियनस को कुछ दिनों पहले अस्पताल लाया गया था। जब उन्होंने पहली बार इसे देखा तो सर्जरी में बहुत जोखिम होने का अंदेशा लग गया था।
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सर्जरी किए बिना बच्चे का जिंदा रहना मुश्किल था। आमतौर पर दिल में चार चैम्बर और चार वॉल्व होते हैं, खून की एक वाहिका शरीर तक खून ले जाती है, जबकि दूसरी वाहिका फेफड़ों तक खून पहुंचाती है।

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दायां फेफड़ा नहीं था, कोई भी वाहिका दाएं फेफड़े तक नहीं जा रही थी

- फोटो : amar ujala
डॉ. जोथी ने बताया कि बच्चे का का दायां फेफड़ा (लंग) नहीं था और कोई भी वाहिका दाएं फेफड़े तक नहीं जा रही थी। उसमें सिर्फ बायां फेफड़ा था और बायीं पल्मोनरी आर्टरी आर्योटा से निकल रही थी।

चिकित्सा की भाषा में इसे हेमीट्रंकस कहा जाता है। मरीज के दिल में बड़ा छेद भी था। आमतौर पर ऑक्सीजन की गति 95-100 होता है लेकिन बच्चे की छाती में संक्रमण के चलते गति सिर्फ 35 पर आ गया था।

बच्चे की मां दतिवा बताती हैं कि वे इस बच्चे को लेकर कई अस्पतालों में चक्कर लगा चुकी हैं, लेकिन कहीं भी डॉक्टरों ने जोखिम नहीं लिया। उन्होंने अपने बच्चे के जीने की उम्मीद ही छोड़ दी थी, आखिरी बार कोशिश करने के लिए यहां पहुंचे।

बॉक्स : ऐसे काम आ गई गाय की वेन
डॉक्टरों ने सबसे पहले दिल का छेद बंद किया। इसके बाद आर्योटा (मुख्य धमनियां) से आ रही बायें फेफड़े की रक्त वाहिका को अलग किया और इस वाहिका एवं दिल के दाएं हिस्से के बीच एक ट्यूब ग्राफ्ट की। ट्यूब को गाय की वेन्स (शिरा) %कॉन्टेग्रा’ से बनाया था। इस वेन (शिरा) में भी वॉल्व होते हैं, जिनका इस्तेमाल हमने दाएं दिल और फेफड़े के बीच में किया। अब %कॉन्टेग्रा’ बाएं फेफड़े तक खून पहुंचा रही है, क्योंकि मरीज में एक ही फेफड़ा था, इसलिए उसे ठीक होने में ज्यादा समय लगा। फिलहाल बच्चा स्वस्थ्य है और शुक्रवार को उसे डिस्चॉर्ज कर दिया है।
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