यूपी के बुलंदशहर के मूल निवासी योगेश के पिता ओमप्रकाश को कई दिनों से शौच के साथ रक्त आने और दर्द होने की शिकायत है। इसे लेकर वे अपने पिता को लेकर डॉ. अंबेडकर अस्पताल पहुंचे थे।
योगेश ने बताया कि उनके पास दिल्ली का आधार कार्ड है, लेकिन पिता के पास नहीं है। पहले तो अस्पताल में डॉक्टरों ने इलाज करने के लिए टाल-मटोल की।
फिर जब उन्होंने बार-बार अपील की, तो एक डॉक्टर ने मरीज के कार्ड पर लिखते हुए उसे एम्स जाकर इलाज कराने की सलाह दी। योगेश का कहना है कि एम्स आने के बाद उन्हें सबसे पहले लंबी लाइन का सामना करना पड़ा।
इसके बाद डॉक्टरों ने देखा और अप्रैल में आकर इलाज कराने की नसीहत दी। योगेश का कहना है कि उनके पिता की हालत बेहद खराब है और वे दर्द से पीड़ित हैं।
एम्स के पूर्व आरडीए अध्यक्ष डॉ. विजय गुर्जर का कहना है कि एम्स में मरीजों की संख्या क्षमता से कई गुना ज्यादा है, इसलिए यहां मरीजों को मुश्किल हो सकती है, लेकिन दिल्ली सरकार के अस्पताल से जुड़ी ये घटना शर्मनाक है।
महज आधार कार्ड न होने की वजह से किसी मरीज को एम्स भेज देना। डॉक्टर, अस्पताल और सरकार सभी को शर्मिंदा कर देने जैसी घटना है। सरकार को इस पर संज्ञान लेना चाहिए।
सभी मरीजों का करते हैं इलाज : डॉ. पुनीता
मुझे इस मामले की जानकारी नहीं है, लेकिन हमारे यहां सभी मरीजों का उपचार किया जाता है। ये कहना है डॉ. अंबेडकर अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पुनीता महाजन का।
उन्होंने बताया कि उनके यहां आधार कार्ड देखकर इलाज नहीं किया जाता। अगर ऐसा किसी डॉक्टर ने किया है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।