डीसीआई के सचिव डॉ. साहा ने बताया कि स्पेशल बच्चे दांतों की सर्जरी के दौरान डेंटिस्ट के निर्देशों का पालन नहीं करते हैं, जबकि इसकी वजह से डॉक्टरों को सर्जरी में परेशानी होती है। स्थिति ऐसी है कि एनेस्थीसिया देकर बच्चे को बेहोश भी नहीं किया जा सकता, इसलिए नाइट्रस ऑक्साइड की कुछ मात्रा इस्तेमाल करनी पड़ती है।
डॉक्टरों को मिलेगी ट्रेनिंग
पिछले सप्ताह की परिषद बैठक में डीसीआई ने जहां गाइडलाइन बनाने का फैसला लिया। वहीं नाइट्रस ऑक्साइड के इस्तेमाल के लिए डॉक्टरों को ट्रेनिंग देने का निर्णय भी लिया, ताकि डॉक्टर बच्चे की उम्र और स्वास्थ्य स्थितियों के अनुसार आसानी से इसकी डोज तय कर सके। डॉ. साहा के अनुसार, इस एक सप्ताह की अवधि वाले कोर्स की शुरुआत दिल्ली स्थित मौलाना आजाद दंत चिकित्सालय, चंडीगढ़ पीजीआई, कटक और महाराष्ट्र के कुछ मेडिकल कॉलेजों में होगी।
पढ़ाई में शामिल होगी ट्रेनिंग
बताया जा रहा है कि कुछ समय बाद डीसीआई बीडीएस कोर्स के साथ ही इस ट्रेनिंग को जोड़ने वाली है, ताकि पढ़ाई के दौरान ही चिकित्सीय विद्यार्थियों को इस गैस के इस्तेमाल के बारे में पर्याप्त जानकारी हो। इसके लिए फिलहाल प्रक्रिया शुरू होने वाली है।