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कोरोना की रिपोर्ट से डॉक्टर तनाव में, 12 दिन बाद पॉजिटिव होने का चला पता

Mon, 25 May 2020 05:22 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली

सार

  • केंद्र सरकार के आरएमएल अस्पताल में जांच की वेंटिंग एक सप्ताह तक
  • अस्पताल में जांच किट्स का भी पड़ा टोटा, लोग परेशान
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कोरोना वायरस - फोटो : PTI
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विस्तार
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कोरोना वायरस को लेकर दिल्ली में एक अलग तरह की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। अस्पतालों में उपचार कर रहे डॉक्टर ही जांच रिपोर्ट को लेकर तनाव में हैं। करीब छह से आठ दिन बाद रिपोर्ट आने से डॉक्टर भी कोरोना को लेकर अब असमंजस्य की स्थिति में हैं। ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला नई दिल्ली स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल (आरएमएल) में देखने को मिला जहां ड्यूटी पर आने के 12 दिन बाद डॉक्टर को पता चला कि वह कोरोना संक्रमित है।

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जानकारी के अनुसार दो दिन पहले 22 मई को एक डॉक्टर कोरोना पॉजिटिव मिला हैं। उन्हें नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (एनडीएमसी) से आए फोन पर पता चला कि वह कोरोना संक्रमित हैं। उनके लिए यह खबर चौंकाने वाली थी क्योंकि पांच दिन पहले ही वह क्वारंटीन से वापस ड्यूटी पर आए थे। गौर करने वाली बात है कि यह जांच रिपोर्ट 12 दिन बाद आई है। 

कोविड वार्ड में ड्यूटी के बाद वह 14 दिन के लिए क्वारंटीन हुए थे। 10 मई को उन्होंने जांच के लिए सैंपल दिया था। उन्हें उम्मीद थी कि रिपोर्ट 12 मई तक मिल जाएगी लेकिन रिपोर्ट 22 मई को पता चली। 15 मई को उनका क्वारंटीन अवधि पूरी हो चुकी थी। 17 मई को उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से यह जानकारी साझा करते हुए पूछा कि अब वह क्या करें? अस्पताल ने उसी दिन ड्यूटी पर आने के निर्देश दिए।
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चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मीनाक्षी भारद्वाज का कहना है कि आरटी पीसीआर जांच किट्स की कमी होने के चलते जांच में देरी हो रही है। इस वक्त आरएमएल पर क्षमता से ज्यादा भार है। अभी तक दूसरे दिन ही जांच रिपोर्ट दी जा रही थी हालांकि अभी कुछ समय पहले किट की कमी होने के चलते जांच लंबित थीं लेकिन अब समस्या को दूर किया जा रहा है।
 
कोरोना की जांच कराना बड़ी चुनौती

दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भी 18 घंटे लैब में जांच चल रही है। यहां सैंपल लेने के बाद करीब चार दिन तक रिपोर्ट मिल रही है। ठीक इसी तरह रोहिणी स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल में दिन में 25 सैंपल ही जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। हालांकि यह कोविड अस्पताल नहीं है लेकिन यहां के डॉक्टरों का कहना है कि स्वास्थ्य कर्मचारियों को ही जांच कराने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। 

दोबारा जांच की जरूरत 
आरएमएल अस्पताल के एक वरिष्ठ डॉक्टर बताते हैं कि 10 मई को 30 सैंपल जांच के लिए गए थे जिनकी रिपोर्ट 12 दिन बाद आई है। जबकि कोरोना वायरस को लेकर 14 दिन की क्वारंटीन अवधि है। जब मरीज को पता चल रहा है कि वह पॉजिटिव है तब तक वह उपचार अवधि के दायरे से बाहर हो जाता है। ऐसे में उक्त मरीज को दोबारा जांच की जरूरत पड़ती है। ठीक इसी तरह 8 मई को 65 सैंपल की जांच रिपोर्ट 16 मई, 24 अप्रैल को भेजे 46 सैंपल की रिपोर्ट 30 अप्रैल को मिली थी।

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