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चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा, पूरे करियर में न्याय के मूल सिद्धांत से नहीं भटका

Mon, 01 Oct 2018 09:35 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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दीपक मिश्रा
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चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने सोमवार को अपने कार्यदिवस के आखिरी दिन कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता और सुप्रीम कोर्ट अपने आप में इतना मजबूत है कि किसी तरह की तिकड़मबाजी काम नहीं आने वाली। सुप्रीम कोर्ट परिसर में आयोजित विदाई समारोह में चीफ जस्टिस ने कहा कि वह बहुत संतुष्ट होकर जा रहे हैं।  

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मालूम हो कि जस्टिस दीपक मिश्रा का चीफ जस्टिस का कार्यकाल बेहद कांटों भरा रहा था। 12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट केचार वरिष्ठतम जज न्यायपालिका के मुखिया (चीफ जस्टिस) के खिलाफ हो गए थे और उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। उस वक्त यहां तक कहा गया कि देश का लोकतंत्र खतरे में है। सनद रहे कि चीफ जस्टिस दो अक्टूबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। 

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि हमारी न्यायपालिका सबसे मजबूत है और हमारे जज बड़ी संख्या में मुकदमों का निपटारा करते हैं। उन्होंने कहा कि बतौर जज अपने पूरे करियर में वह न्याय के मूल सिद्धांत से कभी नहीं भटके। हमेशा निष्पक्ष तरीके से मामलों का निपटारा किया। हमारे में गरीब के आंसू और अमीर के आंसू बराबर है। दोनों के आंसू मेरे लिए मोती के समान हैं।  
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चीफ जस्टिस ने कहा, 'न्याय का मानवीय पहलू होना चाहिए। इतिहास कभी-कभी दयालू होता है और कभी-कभी क्रूर। मैं लोगों को उसके इतिहास से नहीं परखता हूं बल्कि उसके काम व दृष्टिकोण से परखता हूं।’  
 

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ranjan gagoi
वहीं देश के अगले चीफ जस्टिस रंजन गोगई ने कहा,'हम देश में चल रहे जबरदस्त राजनीतिक मंथन के दौर से गुजर रहे हैं। हम जाति, पंथ, धर्म के नाम पर बंटे जुए हैं और हम इस वजह से तिरस्कार और नफरत का शिकार होते हैं, लेकिन जब भी इस तरह की समस्या आएं तो हमें संवैधानिक नैतिकता दिखानी चाहिए।’ 

जस्टिस गोगई ने यह भी कहा कि संवैधानिक नैतिकता बनाने के लिए हमें सामूहिक प्रयास करने की जरूरत है। साथ ही उन्होंने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा द्वारा मॉब लिंचिंग, ऑनर किलिंग, समलैंगिकता, विवाह के अधिकार सहित कई फैसलों की तारीफ की।  

वहीं सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह ने कहा कि चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा को कुछ हालत के दुर्भायपूर्ण तरीके से शिकार हुए। हममे से कुछ लोगों ने इस संस्थान को कमजोर करने की कोशिश की। अगर बार, चीफ जस्टिस की मदद नहीं करती तो न्यायपालिका को अपूर्णीय क्षति होती। 
 
वहीं अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि वह इस बात से सहमत नहीं हैं कि सेवानिवृत्ति के बाद जज को कोई नया पद नहीं लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा होने से जज का टेलेंट बेकार चला जाएगा। साथ ही अटॉर्नी जनरल ने कहा कि अब समय आ गया है जब जजों की सेवानिवृत्त की आयु व उनके वेतन को वृद्धि होनी चाहिए।  

तुम जीओ हजारों साल.... 
अपने कार्य दिवस के आखिरी दिन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा को बार एसोसिएशन के सदस्यों ने अपने-अपने तरीके से आभार व्यक्त किया। सोमवार को जब वह अदालती कार्यवाही खत्म कर उठने वाले थे, कई वकीलों ने चीफ जस्टिस का आभार व्यक्ति किया। इनमे से एक वकील ने 'तुम जीओ हजारों साल...’ गाने के साथ न्यायपालिका को दिए उनके योगदान के शुक्रिया अदा किया। हंसते हुए चीफ जस्टिस ने सभी का अभिवादन स्वीकार किया। परंपरा के मुताबिक, अपने कार्यदिवस के आखिरी दिन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा अगले चीफ जस्टिस (जस्टिस रंजन) व एक अन्य जज के साथ पीठ साझा कर रहे थे।  
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