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'प्रेम विवाह करने वालों को परेशान न करें'

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प्रेम विवाह करने वाले युवक की याचिका पर सुनवाई के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने राहत देते हुए दंपति को एक साथ रहने की अनुमति दी है। याची का आरोप था शादी के बाद से उसकी पत्नी के परिजन उसे धमकियां दे रहे हैं। याचिकाकर्ता युवक ने दूसरे समुदाय की युवती से प्रेम विवाह किया था।
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जस्टिस संजीव खन्ना व आशुतोष कुमार की खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई के बाद युवती के परिजनों को हिदायत देते हुए कहा कि वह बालिग है और अपने पति के साथ रहना चाहती है, इसलिए उसकी जिंदगी में दखल न दी जाए।

याचिका पर सुनवाई के बाद खंडपीठ ने कहा कि हमने युवती से बात की है और वह अपने पति आकाश के साथ जाना चाहती है। कोर्ट के समक्ष पेश होकर युवती ने कहा उसके घरवाले उसे जबरन मेरठ ले गए थे और वहां उसकी शादी किसी अन्य शख्स से कराना चाहते थे जबकि वह अपने पति के साथ रहना चाहती है।
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इस याचिका के बाद सुनाया गया फैसला

हाईकोर्ट ने उक्त निर्देश युवक आकाश की ओर से दायर प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई के बाद सुनाया है। याची का आरोप था कि उसकी पत्नी के परिजन उनकी शादी के खिलाफ थे और उसे आशंका थी कि युवती के परिजन उसकी शादी किसी दूसरी जगह कर देंगे।

मामले की सुनवाई के दौरान दिसंबर 2014 में कहा था कि वह अपनी मर्जी से आकाश के साथ दिल्ली से नोएडा गई थी और अपनी मर्जी से घर वापस आई थी। आकाश से शादी की बात स्वीकार करते हुए युवती ने कहा कि उसने कभी उसे बंधक बनाकर नहीं रखा। युवती ने अपने बयान में कहा था कि शादी के बाद अगले तीन साल तक वह अपने माता-पिता के साथ ही रहना चाहती थी।

इस बयान के मद्देनजर कोर्ट ने युवती को दिल्ली में अपने माता-पिता के साथ रहने की अनुमति दी थी। युवती के माता-पिता को उसकी शादी किसी दूसरी जगह न करने और पुलिस को उक्त आदेश का पालन करने का निर्देश दिया था।

युवती के पति आकाश ने जनवरी में याचिका दायर का युवती को पेश करने का निर्देश देने की मांग की थी। उसने याचिका में कहा कि उसकी पत्नी ने उसे फोन पर बताया है कि माता-पिता उसे मेरठ ले गए और वहां पर उसकी शादी किसी अन्य शख्स से करा दी जाएगी। खंडपीठ ने याचिका के मद्देनजर पुलिस को युवती को तलाश करने का निर्देश दिया था। पुलिस लड़की नहीं ढूंढ पाई थी। इसके बाद कोर्ट ने लड़की व उसके पिता को समन जारी जानकारी देने का निर्देश दिया था।
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