कश्मीरी गेट पहुंचे तो भीड़ में छाता ट्रेन में ही छूट गया और वह वापस ट्रेन में नहीं घुस पाए। इस पर वह बेहद मायूस हो गए और उन्होंने तत्काल डीएमआरसी को ट्वीट कर दादा की आखिरी निशानी को तलाशने की गुहार लगाई।
उन्होंने ट्वीट में लिखा कि वह छाता उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उनके दादा की कोई और निशानी उनके पास नहीं है। इसलिए इस छाते से उनकी भावनाएं जुड़ी हैं। छाता गुम हो जाने पर बेहद परेशान और मायूस हैं। करीब आधा घंटे बाद सुबह 11:03 बजे जब डीएमआरसी द्वारा उन्हें वापस ट्वीट करके एक छाता मिलने की जानकारी तस्वीर के साथ दी तो वह छाता उनका ही निकला।
डीएमआरसी ने ट्वीट में शुभ को बताया कि छाता झिलमिल मेट्रो स्टेशन के कंट्रोल रूम में सुरक्षित है। इस पर शुभ भावुक हो गए और उन्होंने इस मदद के लिए डीएमआरसी का दिल से धन्यवाद दिया। इतना ही नहीं, अन्य यात्रियों को भी इस घटना ने भावुक कर दिया।