बाद में उसको सांचे में डालकर संबंधित रूप दे दिया जाता है। उन्होंने बताया कि प्रधान पति दिवाली के अवसर पर गोबर से बने दीये, भगवान की मूर्तियां आदि बनाकर बेचते हैं। जिसका पैसा अस्थाई गोशाला में ही गोवंश के संरक्षण के लिए लगाया जाता है।
गोशाला में करीब 80 गोवंश है, जिनके गोबर को खाद के रूप में प्रयोग किया जाता है। जिससे फसल बेहद अच्छी होती है और स्वास्थ्य के लिए लाभदायक भी होती है। उधर, डीएम रविंद्र सिंह ने बताया कि गोवंश के गोबर से बने दीये और अन्य कलाकृतियों की मांग धीरे-धीरे काफी बढ़ रही है।
दूरदराज से लोग ऑर्डर देकर अपने पसंद का सामान बनवाते हैं। उन्होंने बताया कि इस बार दिवाली पर उन्होंने स्वयं अपने आवास के लिए गोवंश के गोबर से बने दीये मंगवाए हैं। उन्होंने अन्य लोगों से भी इसी प्रकार के दीये प्रयोग में लाने की अपील की है।