डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन-VI, नई दिल्ली की प्रेजिडेंट पूनम चौधरी और मेंबर शेखर चंद्र ने रोहिणी निवासी धवेंद्र कुमार और उनकी पत्नी अनीता की शिकायत पर यह फैसला सुनाया।
नई दिल्ली की जिला उपभोक्ता आयोग ने एलआईसी के दावे के खिलाफ और शिकायतकर्ता के पक्ष में अपना फैसला सुनाया है। आयोग ने कहा कि पॉलिसी की शर्तें तभी बाध्यकारी होंगी जब उन्हें पॉलिसी धारक को दिया और समझाया गया हो।
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इस जिम्मेदारी को पूरा करने में एलआईसी को विफल मानते हुए आयोग ने आदेश दिया कि वह शिकायतकर्ताओं को सर्जरी में हुए खर्च की प्रतिपूर्ति सात प्रतिशत की दर से ब्याज के साथ करे। इसके अलावा एलआईसी को रिफंड के लिए शिकायतकर्ताओं के दावे ठुकरा कर उन्हें परेशान करने के लिए 50 हजार रुपये का मुआवजा और 50 हजार मुकदमेबाजी में हुए खर्च के तौर पर देने का भी आदेश दिया है।
डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन-VI, नई दिल्ली की प्रेजिडेंट पूनम चौधरी और मेंबर शेखर चंद्र ने रोहिणी निवासी धवेंद्र कुमार और उनकी पत्नी अनीता की शिकायत पर यह फैसला सुनाया। उन्होंने एलआईसी कनॉट प्लेस के ब्रांच मैनेजर और मेड सेवा हेल्थ केयर (टीपीए) लिमिटेड, दिल्ली के खिलाफ कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 1986 के प्रावधानों में सेवा में कमी की शिकायत दायर की। उनकी शिकायत के अनुसार उन्होंने 2008 में एलआईसी से हेल्थ प्लस मेडिकल इंश्योरेंस लिया, जो 29 साल के लिए था।
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पॉलिसी में टोटल 2 लाख रुपये तक का रिस्क कवर था और यह 8 अगस्त 2008 से प्रभावी थी। शिकायतकर्ता की पत्नी को 2011 में गंभीर बैक पेन हुआ। गंगा राम अस्पताल के डॉक्टरों ने स्पाइनल सर्जरी कराने की सलाह दी थी।