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एम्स में विवादः आखिर क्यों एक रिटायर्ड चिकित्सक को सभी अधिकारों संग बहाल कर रही सरकार

Fri, 21 Oct 2016 10:55 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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एम्स
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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) से सेवानिवृत्त होने के बाद एक फैकल्टी (चिकित्सक) को सभी प्रशासनिक शक्तियों के साथ सरकार ने दोबारा से बहाल करने का निर्णय लिया है।
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सरकार के इस फैसले से एम्स फैकल्टी एसोसिएशन को आपत्ति है। इसकी शिकायत एसोसिएशन की ओर से केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जे.पी.नड्डा को की गई है और इसकी प्रति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजी गई है।

फैक्लटी एसोसिएशन एम्स (फैम्स)की ओर से स्वास्थ्य मंत्री को लिखे पत्र में कहा गया है कि सभी प्रशासनिक शक्तियों के साथ फिर से नौकरी पर रखना और वह भी अनुबंध के आधार पर गलत परंपरा है।
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इससे न सिर्फ एम्स की स्वायत्तता पर असर पड़ेगा बल्कि एम्स में बाहरी हस्तक्षेप भी बढ़ सकता है। सेवानिवृत्ति के बाद बहाल करने की कोई सर्वमान्य नीति नहीं है, लिहाजा जिनकी पहुंच सरकार तक होगी और लॉबिंग करने में सफल होंगे उन्हें पद मिल जाएगा।

यदि सरकार सेवानिवृत्ति के बाद किसी चिकित्सक को नौकरी पर रखती है और चिकित्सक सेवा करना चाहता है तो उस चिकित्सक के पास प्रशासनिक अधिकार नहीं होना चाहिए।

दरअसल, पिछले दिनों सरकार ने एम्स के कैंसर विभाग के प्रमुख के पद से सेवानिवृत्त हुए डॉ.जी.के.रथ को तीन वर्ष के लिए सभी प्रशासनिक शक्तियों के साथ री-इंप्लाइमेंट दी है। पत्र में डॉ.रथ का जिक्र नहीं किया गया है लेकिन निशाना इनकी नियुक्ति को लेकर ही है। डॉ.रथ को अगले तीन वर्ष केलिए एम्स कैंसर विभाग के प्रमुख और झज्जर में बन रहे राष्ट्रीय कैंसर संस्थान के भी प्रमुख का पद दिया गया है।
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