दिल्ली में चल रहे राजनीतिक संकट को लेकर कोई भी पार्टी खुलकर अपनी राय नहीं रख रही। एक ओर तो पार्टियां राजधानी में दोबारा चुनाव कराने की बात कहती हैं तो दूसरी ओर इन दलों के नेता सरकार बनाने की जोड़तोड़ में लगे हैं।
पिछले साल हुए चुनावों के बाद 49 दिनों तक सत्ता चलाने वाले आम आदमी पार्टी इस रेस में सबसे आगे है।
पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल और अन्य दिग्गज नेता दिल्ली में दोबारा चुनाव कराने का राग जप रहे हैं तो वहीं, पार्टी के विधायक सरकार बनाने के लिए कांग्रेस से समर्थन मांग रहे हैं। इस मसले पर आम आदमी पार्टी के भीतर एक बार फिर टकराव की स्थिति आ गई है।
पार्टी के भीतर ही छिड़ा है शब्द वार!
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, कुछ दिन पहले दिल्ली में दोबारा विधानसभा चुनाव के खिलाफ वकालत करने वाले आम आदमी पार्टी के नेता और दक्षिणी दिल्ली सीट से लोकसभा चुनाव लड़ने वाले देविंदर सहरावत अब पार्टी को दोबारा चुनाव कराने की तैयारी करने का आग्रह कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि दिल्ली में दोबारा सरकार बनाने के लिए जो समय था वह निकल गया। अब इस स्थिति में कांग्रेस से समर्थन लेकर सरकार बनाना ठीक नहीं है। बता दें कि सहरावत ने पिछले साल विधानसभा चुनाव लड़ा था लेकिन हार गए थे।
सहरावत के इस बयान से इतर पार्टी के विधायक राजेश गर्ग दिल्ली में सरकार बनाने के लिए खुद ही कांग्रेस से समर्थन मांगने पहुंच गए।
खुद मांगा कांग्रेस से समर्थन
सहरावत ने कहा कि कांग्रेस को इस बात का भरोसा हो चुका है कि दिल्ली की में उसका वोट बैंक आप के पक्ष में जा चुका है। ऐसी स्थिति में कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाना संभव नहीं है।
आम आदमी पार्टी के विधायक राजेश गर्ग ने कांग्रेस से आग्रह किया है कि वह फिर से दिल्ली में सरकार बनवाने के लिए आगे आएं। उन्होंने कहा कि वह फिर से ‘आप’ को समर्थन दें क्योंकि ‘आप’ ही दिल्ली में सरकार बनाने की स्थिति में है।
विधायक राजेश गर्ग के इस बयान के तुरंत बाद पार्टी ने इस पर अपनी राय दी। पार्टी ने कहा कि यह गर्ग की निजी राय है इसका पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है।
क्यों है ये हंगामा?
पिछले महीने हुई पार्टी मीटिंग में कई विधायकों ने संयोजक अरविंद केजरीवाल से दिल्ली में सरकार बनाने का आग्रह किया था। इसके बाद पार्टी ने उपराज्यपाल को पत्र लिखकर यह मांग की थी कि 'आप' सरकार बनाने के लिए दिल्ली की जनता के बीच एक बार फिर ओपिनियन पोल कराना चाहती है।
उधर, आम आदमी पार्टी की कोशिशों और अंदरूनी टकराव की खबरों के बीच कांग्रेस दिल्ली में किसी भी पार्टी को समर्थन देने से साफ इंकार कर दिया है।
अब केजरीवाल और उनके सिपाहियों के सामने यह समस्या भी है कि वह सरकार बनाएं भी तो कैसे? अगर दोबारा चुनाव में जाते हैं तो नुकसान उठाना पड़ सकता है।
वहीं, चुनाव की रट लगाने वाले विधायकों को इस बात की चिंता है कि अगर दोबारा चुनाव हुए तो उनकी सीट तो छिनेगी ही सारी सुविधाएं भी छिन जाएंगी।