डीडीए को मौजूदा नीति के तहत कार्रवाई के दिए निर्देश, नई कन्वर्जन नीति पर भी मांगी तेजी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को लीजहोल्ड संपत्तियों को फ्रीहोल्ड में बदलने के लिए लंबित आवेदनों पर दो महीने के भीतर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि जिन संपत्ति मालिकों ने कन्वर्जन के लिए आवेदन करने के साथ शुल्क भी जमा कर दिया है, उन्हें लंबे समय तक इंतजार नहीं कराया जा सकता।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह और न्यायमूर्ति विकास महाजन की पीठ ने कहा कि लंबित आवेदनों का निपटारा मौजूदा नीति के अनुसार किया जाए। साथ ही, भविष्य में आने वाले आवेदनों के लिए आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय (एमओएचयूए) और डीडीए नई कन्वर्जन नीति तैयार कर सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि लीजहोल्ड संपत्तियों को फ्रीहोल्ड में बदलने का मुद्दा लंबे समय से लंबित है और इससे दिल्ली के संपत्ति मालिकों को परेशानी हो रही है। विशेष रूप से वे लोग प्रभावित हैं, जिन्होंने आवेदन के साथ कन्वर्जन शुल्क भी जमा कर दिया है, लेकिन उनके मामलों पर अब तक कार्रवाई नहीं हुई।
सुनवाई के दौरान एमओएचयूए के सचिव की ओर से बताया गया कि नई कन्वर्जन नीति तैयार करने में करीब चार महीने लग सकते हैं। कोर्ट ने इस समय-सीमा पर सहमति नहीं जताई। अदालत ने कहा कि इससे प्रक्रिया दिसंबर 2026 या जनवरी 2027 तक खिंच सकती है और कन्वर्जन का काम लंबे समय तक प्रभावित रहेगा।
छह महीने में नीति पर ठोस प्रगति नहीं
कोर्ट ने कहा कि तीन जुलाई से जारी विभिन्न आदेशों के बावजूद कन्वर्जन नीति तैयार करने की दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। एमओएचयूए के हलफनामे में भी नीति को अंतिम रूप देने की स्पष्ट समय-सीमा नहीं बताई गई थी। मामला डीडीए के आईडीएलआई पोर्टल से भी जुड़ा है। यह पोर्टल 2 जनवरी से उपलब्ध नहीं है, जिससे संपत्ति मालिक नए कन्वर्जन आवेदन नहीं कर पा रहे हैं।