राजेश गुप्ता ने पूछताछ में खुलासा किया है कि वह मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का हिस्सा है। वह पिछले करीब छह वर्षों से मादक पदार्थों की तस्करी की गतिविधियों में लिप्त है। आरोपी भारतीय सेना की नागा रेजिमेंट में सिपाही (जीडी) था। एक वित्तीय घोटाले में भारतीय सेना ने उसका कोर्ट मार्शल और बर्खास्त कर दिया गया। इसके बाद कोहिमा जेल भेज दिया गया। जेल में वह सुशील नाम के व्यक्ति के संपर्क में आया। सुशील के कहने पर कम समय में अधिक पैसा कमाने के लिए वह मादक पदार्थों की सप्लाई करने लगा।
राजेश गुप्ता मणिपुर निवासी लिमनथांग से हेरोइन की खेप लेता था। इसके बाद ये शिवम, पंकज व सुशील को देता था। पुलिस से बचने के लिए वह हेरोइन की सप्लाई के लिए सार्वजनिक परिवहन सेवा बसों व ट्रेन में सफर करता था। हेरोइन को छिपाने के लिए वह बैग में भारतीय सेना की वर्दी रखता था।
राजेश गुप्ता यूपी के कुशीनगर के स्थायी निवासी है। उसने 10वीं कक्षा तक शिक्षा प्राप्त की। उसका एक छोटा भाई और दो बहनें हैं। वह शादीशुदा है और उसके तीन बच्चे हैं। वह वर्ष 1994 में सिपाही (जीडी) के रूप में सेना में भर्ती हुआ था। उसने सेना में 12 साल काम किया। वर्ष 2006 में, एक वित्तीय घोटाले में, उसे भारतीय सेना द्वारा कोर्ट मार्शल और बर्खास्त कर दिया गया था। इसके बाद उसे कोहिमा जेल में डाल दिया गया था। जेल में वह सुशील नाम के व्यक्ति के संपर्क में आया जिसने उसे मादक पदार्थों की तस्करी में अपने साथ काम करने का लालच दिया। इसके बाद इन्होंने मणिपुर के ड्रग सप्लायर्स से हेरोइन खरीदकर सप्लाई करना शुरू कर दिया।