मारुति-सुजुकी कंपनी के मानेसर प्लांट से बर्खास्त सैकड़ों कर्मचारियों की माली हालत दयनीय हो गई है। न्याय को लेकर उन्होंने सड़क पर उतरने का मन बनाया है।
मारुति के मानेसर प्लांट में 18 जुलाई, 2012 को हिंसा के बाद तकरीबन 2,300 कर्मचारी बर्खास्त किए गए थे। इसमें 546 स्थाई कर्मचारी, 1,800 कांट्रैक्ट सहित कैजुलअ और ट्रेनी थे।
बर्खास्त कर्मी राजपाल और महावीर ने बताया कि न्याय की गुहार के लिए बर्खास्त कर्मी सपरिवार 15 जनवरी को कैथल से दिल्ली तक पदयात्रा निकालेंगे। इसे जनजागरण यात्रा नाम दिया गया है।
मारुति-सुजुकी वर्कर्स यूनियन की प्रोविजनल कमेटी के सदस्य रामनिवास (बर्खास्त कर्मी) ने बताया कि यह पदयात्रा 28 जनवरी को गुड़गांव पहुंचेगी। वहां पर गुड़गांव से बावल तक के उद्योगों की तकरीबन 70 यूनियनें बर्खास्त कर्मियों को अपना समर्थन देंगी। मारुति के सभी बर्खास्त कर्मी कमला नेहरू पार्क में प्रदर्शन करेंगे।
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गुड़गांव से यह पदयात्रा 31 जनवरी को दिल्ली के जंतर-मंतर पर पहुंचेगी। वहां से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपने की योजना तैयार की है। उन्होंने कहा कि बर्खास्त कर्मचारियों का घर-परिवार चलाना मुश्किल हो गया है।
जल्द ही कुछ नहीं हुआ तो सैकड़ों परिवार बिखर जाएंगे। बच्चों की पढ़ाई, चिकित्सा की बात तो दूर भविष्य में दो वक्त की रोटी के भी लाले पड़ जाएंगे। अब न्याय पाने के लिए परिवार सहित सड़क पर उतरने के अलावा कोई और चारा नहीं बचा है। शायद इससे कुछ भला हो जाए।
क्यों हुए थे बर्खास्त?
बर्खास्त कर्मियों पर आरोप है कि वह मारुति-सुजुकी के मानसेर प्लांट में आगजनी और तोड़फोड़ में संलिप्त थे। एचआर मैनेजर की हत्या भी उस दौरान हो गई थी। इन सभी मामलों में 148 मारुति कर्मियों को आरोपी बनाया गया था। इसमें से एक-दो जमानत पर बाहर है। अन्य 147 आरोपी अभी भी जेल में हैं। दो और आरोपियों की जमानत याचिका कोर्ट में है। इसी माह उसकी सुनवाई है।
क्या हैं इनकी मांगें?
मारुति-सुजुकी हिंसा मामले में जेल में बंद 147 कर्मियों की रिहाईसभी स्थाई और अस्थाई बर्खास्त कर्मियों की बहालीउन पर लगाए गए सभी आरोप वापस लिए जाएंमुकदमा भी वापस लिया जाएकुछ लोगों की गलती की सजा सैकड़ों को देना गलतमारुति मानेसर प्लांट हिंसा की न्यायिक जांच कराई जाए