उप राज्यपाल की मुहर लगने के बाद दिल्ली की तीनों बिजली वितरण कंपनियों के खातों की जांच सीएजी से कराने का रास्ता साफ हो गया है।
इस जांच से बचने के लिए कंपनियों को अब अदालत का ही सहारा बचा है। सरकार के फैसले पर कोर्ट से स्थगन आदेश मिले तभी यह जांच थमेगी। हालांकि सहयोग न करके भी कंपनियां जांच को लटकाए रख सकती हैं।
सीएजी सूत्रों के मुताबिक जैसे ही ऑडिट के लिए औपचारिक पत्र मिलेगा, इस दिशा में कार्य शुरू कर दिया जाएगा। तीनों बिजली कंपनियों से जुलाई-2002 से लेकर अब तक खातों से संबंधित दस्तावेज और आय-व्यय से जुड़े कागजात मांगे जाएंगे।
दस्तावेजों के मिलने के बाद उनके खातों की जांच शुरू कर दी जाएगी। यद्यपि मुख्यमंत्री ने सीएजी से तीन माह में ऑडिट पूरा करने का आग्रह किया है, लेकिन जांच की यह अवधि डिस्कॉम्स के सहयोग और उनकी कार्य प्रणाली पर भी निर्भर करेगा।
अभी तक बिजली कंपनियों को लग रहा था कि निजी कंपनी होने के नाते उनका सीएजी ऑडिट नहीं हो सकता है, लेकिन सरकार के सख्ती के सामने डिस्कॉम्स के दावे धरे रह गए।
कई वर्षों से दिल्ली के आम बिजली उपभोक्ताओं के साथ-साथ दिल्ली सरकार और डीईआरसी भी परोक्ष या अपरोक्ष रूप से डिस्कॉम्स के खातों की जांच सीएजी से कराने पर सहमत थी।
लेकिन पूर्ववर्ती दिल्ली सरकार की कमजोर इच्छाशक्ति इसके आड़े आती रही। सरकारी आदेश के बाद पहले भी निजी कंपनी रिलायंस के केजी बेसिन और दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (डायल) का सीएजी ऑडिट किया गया है।
ऑडिट पर कभी नहीं थी कोर्ट की रोक
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिजली कंपनियां अपने जवाब में एक भी ऐसी वाजिब वजह नहीं बता पाईं जिससे ऑडिट न किया जाए। जनता पिछले चार साल से मांग कर रही थी कि बिजली कंपनियों के खातों का ऑडिट किया जाए।
पिछली सरकार चार साल तक यह कहकर जनता को गुमराह करती रही कि ऑडिट पर हाईकोर्ट ने रोक लगा रखी है। हमने फाइलों की पड़ताल की तो पाया कि कोर्ट ने कभी ऐसी कोई रोक नहीं लगाई थी।
सीएजी ऑडिट पर आरडब्ल्यूए की राय
बिजली कंपनियों की खातों की जांच सीएजी से कराने के आदेश से दिल्ली की आरडब्ल्यूए की संस्था बेहद खुश है।
आरडब्ल्यूए का कहना है कि डिस्कॉम्स के सीएजी ऑडिट पर वर्षों से लड़ाई चल रही थी। इसके लिए अदालत तक गए, लेकिन नई सरकार के कड़े फैसले ने काम आसान किया और आरडब्ल्यूए की मेहनत रंग लाई।
ग्रेटर कैलाश से आरडब्ल्यूए सदस्य राजीव काकरिया का कहना है कि वह सीएजी ऑडिट का स्वागत करते हैं। लेकिन इस बात की भी सीएजी को जांच करनी चाहिए कि टैक्स अथॉरिटी में डिस्कॉम्स ने क्या लेखा-जोखा दिया है। क्योंकि अथॉरिटी में डिस्कॉम्स की ओर से लाभ दिखाया गया है और डीईआरसी में घाटा बताया है।