दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग ने मान लिया है कि बिजली कंपनियों का घाटा करीब 18 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। ऐसे में आज नहीं तो कल इस रकम को दिल्ली के बिजली उपभोक्ताओं से ही वसूला जाना है।
दिल्ली की तीनों बिजली वितरण कंपनियों ने दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग को सौंपे एन्युल रेवेन्यू रिक्वॉयरमेंट (एआरआर) में रेगुलेट्री एसर्ट्स 20,968 करोड़ रुपये बताया था।
डिस्कॉम्स के हिसाब-किताब को जांचने के बाद आयोग ने डिस्कॉम्स का रेगुलेट्री एसर्ट्स 17,613 करोड़ रुपये स्वीकार कर लिए हैं।
छह साल तक लागू रहेगा ये प्लान
इसका सीधा मतलब है कि इस रकम को दिल्ली के बिजली उपभोक्ताओं से ही वसूली जानी है। इस रकम को कैसे वसूला जाए, इसके लिए आयोग ने रोडमैप तैयार कर लिया है और उस पर काम भी किया जा रहा है।
पुराने घाटे को पाटने के लिए आयोग ने कुल बिजली बिल पर आठ प्रतिशत का सरचार्ज लगाया है।
यह अगले छह वर्षों तक लगातार लिया जाता रहेगा। आठ प्रतिशत सरचार्ज से डिस्कॉम्स को प्रति वर्ष 1386 करोड़ रुपये प्राप्त होने का अनुमान है।
दिल्ली सरकार ने केंद्र को लिखी चिट्ठी
लांग टर्म पावर परचेज से हुए घाटे की वजह से ही आयोग ने दिल्ली सरकार और केंद्र को पत्र लिखा है कि डिस्कॉम्स की ओर से अरावली पावर प्लांट से खरीदी जा रही करीब 200 मेगावाट पावर को सरेंडर करने की अनुमति दी जाए।
यही नहीं, मध्य प्रदेश के शासन पावर प्लांट से सस्ती बिजली खरीदने पर भी बात अंतिम दौर में है।
इस प्लांट से दिल्ली को 200 से 250 मेगावाट बिजली मिल सकती है। इस प्लांट से बिजली खरीदने पर डिस्कॉम्स को प्रति यूनिट 1.20 रुपये बिजली कीमत चुकानी होगी।