मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली बोर्ड को निर्देश दिया है कि मार्च तक यमुना नदी में गिरने वाले सभी नालों के ट्रीटमेंट प्लांट तैयार हो जाने हैं। इसके लिए जल बोर्ड को इंटरसेप्टर प्रोजेक्ट शामिल न होने वाले छोटे नालों की मैपिंग करके समाधान निकालना है। इस बारे में मुख्यमंत्री ने बीते दिनों समीक्षा बैठक की। अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि इस बार तयशुदा समय से पहले प्रोजेक्ट करना है।
दिल्ली सरकार यमुना में गिरने वाले नालों की गंदगी साफ करने के लिए इंटरसेप्टर प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। नजफगढ़, शाहदरा व सप्लीमेंट से जुड़ा यह प्रोजेक्ट दिसंबर तक पूरा होने की उम्मीद है। केंद्र सरकार की कंपनी इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड प्रोजेक्ट की परामर्शदाता है। फिलहाल कंपनी नदी में गिरने वाले छोटे-बड़े नालों व इसमें बहने वाले सीवेज का आकलन कर रही है। इसकी लिस्ट 15 अक्तूबर तक तैयार हो जाएगी। वहीं, कंपनी 15 नवंबर तक नालों के ट्रीटमेंट का एक्शन प्लान भी सरकार को सौंप देगी।
इंटरसेप्टर प्रोजेक्ट लांच होने के बाद भी तीनों नालों की सफाई नहीं हो सकती। इसकी बड़ी वजह यह है कि अभी करीब 200 छोटे नाले ऐसे भी हैं, जो इंटरसेप्टर प्रोजेक्ट से जुड़े नहीं हैं। बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि बगैर छोटे नालों को साफ किए यमुना नदी साफ नहीं हो सकती। इस दौरान डीजेबी ने बताया कि इसकी मैपिंग के लिए पहले ही इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड को काम दिया गया है। तयशुदा समय में इन्हें पूरा कर लिया जाएगा।
ईआईएल तयशुदा वक्त में पूरा करेगा काम
-31 सितंबर तक इंटरसेप्टर प्रोजेक्ट में शामिल न होने वाले नालों की होगी मैपिंग
-15 अक्तूबर पर सभी नालों के फ्लो का होगा आकलन
-15 नवंबर तक तैयार हो जायेगा एक्शन प्लान
-अगले साल मार्च तक इससे जुड़े प्रोजेक्ट होंगे तैयार