गांव सागरपुर के चुनावी संग्राम में गांव की गंदगी चुनावी मुद्दा बन गया है। गांव की सड़कों पर बरसात के मौसम की तरह जलभराव की समस्या लोगों की परेशानी का सबब बनी हुई है।
400 से ज्यादा वोट होने के कारण प्रत्याशी पुरानी पंचायत पर दलितों की उपेक्षा का आरोप लगाकर वोटों में सेंध लगा रहे है।
प्याला गांव से सीधे मलेरना का रास्ता सागरपुर होते हुए जाता है लेकिन यह रास्ता इन दिनों कीचड़ और गंदे पानी से लबालब हुआ पड़ा है।
इस बावत कई बार ग्राम पंचायत में मामला उठाया गया लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हो सका। गांव में 1950 मतदाताओं में से करीब 400 दलित समुदाय से है।
इसलिए चुनाव में इसबार फिरनी वाला रास्ता मुख्य मुद्दा बन गया है, क्योंकि इसके आसपास दलितों की आबादी सबसे ज्यादा है। कुछ हिस्से को छोड़ दे तो गांव की अधिकांश नालियां कच्ची पड़ी है।
गांव की कई सड़कें अभी भी अधूरी पड़ी है। मुख्य चौराहे से चौपाल तक जाने वाला रास्ता भी अधूरा पड़ा है। यह सांसद निधि से बनना था, लेकिन काम बीच में ही बंद हो गया।
जिसके कारण लोगों को आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अधूरे काम को लेकर ग्रामीण कई बार सरपंच से लेकर विधायक तक को गुहार लगाई, लेकिन इनके कानों में जूं तक नहीं रेंगी।
पूरानी ग्राम पंचायतें युवाओं के लिए भी कुछ विशेष नहीं कर पाई। गांव में न व्यायामशाला है और न ही लड़कियों के लिए सिलाई केंद्र। गांव में स्वच्छ भारत मिशन की पोल भी खुली हुई है। लोगों का कहना है कि हर बार जनप्रतिनिधि मौहल्ला, जाति-बिरादरी के नाम पर लोगों को ठगाते है।