कूड़ा डालने के लिए नोएडा के सेक्टर 42 और 43 में डंपिंग ग्राउंड बनाए जाने से यहां के निवासी खासे परेशान हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्राधिकरण की ओर से तो यहां कचरा डंप किया ही जाता है।
अलग-अलग सेक्टरों से रिक्शे व ठेले से भी कूड़ा लाकर यहां गिरा दिया जाता है। इससे लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव तो पड़ रहा है। साथ ही गंदगी और बदबू के कारण यहां से लोगों का गुजरना भी मुश्किल हो जाता है।
हालांकि सेक्टर-42 अभी विकसित नहीं हो पाया है लेकिन इसके भूगोल के बारे में बताया जाए तो इसके एक ओर सेक्टर-46 का इलाका है, जहां कई अच्छी सोसायटी विकसित हैं। वहीं उसके ठीक दूसरी ओर सदरपुर का इलाका है। इसके पीछे सेक्टर-48 और सेक्टर-43 का इलाका है।
इन क्षेत्रों में बड़ी व छोटी दोनों तरह की इमारतें हैं। अगर इस सेक्टर से गुजरने वाले रास्तों की बात की जाए तो यहां से होकर सेक्टर-37, 46, 47, 48, 105, 107, 110 व दादरी के इलाकों में जाया जा सकता है।
आरडब्ल्यूए के सदस्यों के मुताबिक इस डंपिंग ग्राउंड के बाबत कई बार नोएडा विकास प्राधिकरण व स्वास्थ्य विभाग को चिट्ठी लिखी गई। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। यहां खाल निकालकर पशुओं की लाश डाल दी जाती है, इससे उठने वाली दुर्गंध से आसपास रहने वाले लोगों का जीना मुहाल है। वहीं कूड़ा जलाने के बाद निकलने वाले धुएं से भी काफी परेशानी होती है।
बीते 10 वर्ष से है ऐसे हालत
सेक्टर-48 आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष दिनेश भाटी का कहना है कि सेक्टर-42 के खाली पड़े प्लॉट में कूड़ा डालने के लिए डंपिंग ग्राउंड बना दिया गया है। इस बाबत कई बार नोएडा विकास प्राधिकरण, स्वास्थ्य विभाग को चिट्ठी लिखी गई। लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। खाली प्लॉट की बाउंड्री कराने की मांग की गई ताकि बाहरी व्यक्ति यहां कूड़ा न डाल पाए। लेकिन इस पर भी कोई सुनवाई नहीं हुई। यह सब बीते 10 वर्ष से चल रहा है।
यहां से गुजरने में होती है परेशानी
सेक्टर-44 आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष किशन बंसल ने बताया कि खाली प्लॉट में मृत पशुओं को फेंक दिया जाता है, जिससे जानलेवा दुर्गंध उठता है। लाश को खाने के लिए यहां दूसरे जानवर आते हैं और अगल बगल की सोसायटी में भी गंदगी फैला देते हैं। यहां से कई सेक्टरों के निवासियों का आना जाना होता है। यहां से गुजरने में उन्हें काफी परेशानी होती है। यही नहीं रिक्शा और ठेले वाले अन्य दूसरे सोसायटी का कूड़ा भी यहां फेंक जाते हैं।