छानबीन के दौरान पुलिस को पता चला कि कंपनी के पास बीबीए करने की अनुमति ही नहीं थी। जांच में यह भी पता चला कि आरोपियों ने एक ही प्रॉपर्टी को कई खरीदारों को बेच दिया। छानबीन के बाद पुलिस ने धोखाधड़ी के आरोप में 13 जनवरी को हरिंदर वशिष्ठ को गिरफ्तार कर लिया। चार दिन की पुलिस रिमांड के बाद उसे कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया।
साढ़े तीन साल में प्रोजेक्ट पूरा करके निवेशकों को सौंपनी थी प्रॉपर्टी...
जेस्था प्रोजेक्ट्स और वर्धमान एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड को साढ़े तीन साल में प्रोजेक्ट को पूरी कर यूनिट ग्राहकों को सौंपनी थी। लेकिन आज तक न तो प्रोजेक्ट पूरा हुआ और न ही ग्राहकों के पैसे ही वापस किए गए।
इसके अलावा लीज डीड के अनुसार वह बिल्डर बायर्स एग्रीमेंट (बीबीए) भी नहीं कर सकते थे। आरोपियों ने ठगी के लिए एक ही प्रॉपर्टी को कई खरीदारों को बेच दिया। आर्थिक अपराध शाखा की टीम ने नोएडा प्राधिकरण की मदद से लीज डीड की गहनता से पड़ताल की। छानबीन के बाद आरोपों को सही पाए जाने के बाद मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया गया।
अब पुलिस बाकी आरोपियों की तलाश कर रही है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों को जल्द ही दबोच लिया जाएगा।
कहा, आईटी कंपनियां भी प्रोजेक्ट में कर रहीं निवेश...
छानबीन के दौरान पुलिस की टीम को पता चला है कि आरोपियों ने पीड़ितों को जाल में फंसाने के भरसक प्रयास किए। उन्होंने खरीदारों से कहा कि उनके प्रोजेक्ट में आईटी कंपनियां भी निवेश कर रही हैं। वह यहां अपने दफ्तर खोलेंगी। ऐसे में उनकी खरीदी गई प्रॉपर्टी के दाम दोगुने और चौगुने हो जाएंगे। इसके बाद कई निवेशक उनके जाल में फंस गए।