विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि केवल सब्सिडी देने के बजाय इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग के लिए चरणबद्ध अनिवार्य लक्ष्य तय किए जाएं। शुरुआत मालवाहक वाहनों, दोपहिया-तिपहिया और दिल्ली की करीब नौ हजार पीली स्कूल बसों को इलेक्ट्रिक में बदलने से करने की सिफारिश की गई। योजना का उद्देश्य प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की पहचान कर उन पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना और दिल्ली-एनसीआर को स्वच्छ परिवहन आधारित क्षेत्र में बदलना है।
तीन फीसदी वाहन, लेकिन प्रदूषण में एक-तिहाई हिस्सेदारी
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव महमूद अहमद ने बताया कि पुराने वाणिज्यिक वाहनों को हटाने के लिए परिवर्तन योजना पर काम चल रहा है। इसके तहत वाहन स्क्रैप कराने पर सड़क कर में छूट, पंजीकरण शुल्क में राहत और ब्याज सब्सिडी जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि वाणिज्यिक वाहन कुल वाहनों का केवल करीब तीन प्रतिशत हैं, लेकिन वे वाहन प्रदूषण में लगभग 33 प्रतिशत तक योगदान देते हैं। ऐसे में पुराने व अधिक प्रदूषणकारी वाणिज्यिक वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाना जरूरी है।
ई-वाहनों के लिए अब सिर्फ प्रोत्साहन नहीं, तय हों अनिवार्य लक्ष्य
विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि स्वच्छ परिवहन को गति देने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग संबंधी चरणबद्ध अनिवार्य लक्ष्य निर्धारित किए जाएं। उनका मानना है कि इससे मालवाहक, दोपहिया, तिपहिया व बसों के तेजी से विद्युतीकरण के साथ प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकेगी।